
पहली मोहर्रम को विभिन इमाम बारगाहों में हुईं मजलिसें
राष्ट्र पटल संवाद
इटावा। गम के प्रतीक मोहर्रम में दरगाह हज़रत अब्बास महेरे पर नफीसुल ज़ैदी व शरीफ मंज़िल सैदबाड़ा में राहत अक़ील शक्कन की इमाम बारगाह, घटिया अज़मत अली इमाम बारगाह में आदिल अख्तर गुडडू, मिश्री टोला में रज़ी हैदर की ओर से मजलिसों का आयोजन हुआ।
मजलिसों में तकरीर करते हुये मौलाना अनवारुल हसन ज़ैदी इमामे जुमा इटावा ने कहा हम जो अमल करें उसमे खुलूस होना चाहिए ताकि अमल कुबूल हो जाये। इमाम हुसैन ने सब कुछ बर्दाश्त किया लेकिन इंसानियत का दामन नही छोड़ा। इमाम हुसैन हिदायत का चिराग और निजात की कश्ती हैं। जिसे हिदायत और निजात चाहिए उसे इमाम हुसैन का दामन थामना होगा। उन्होंने कहा कि साल का अंत तौबा के साथ करना चाहिए और मजलिस में हमेशा वूज़ू की स्थिति में आना चाहिए ताकि शैतानी वसवसों से बचा जा सके। सलवात पढ़ने में कभी सुस्ती या कंजूसी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह मोमिन की पहचान है।
मजलिस में तसलीम रज़ा, जहूर नक़वी ने सोज ख्वानी की, खुर्शीद जाफरी, आसिफ रिज़वी, सलमान रिज़वी, आबिद रज़ा, मोहम्मद सादिक, वली अहमद ने कलाम पेश किए और तनवीर हसन व राहिल सगीर ने नोहा ख्वानी की। मजलिस में अल्हाज सैयद कमर अब्बासहाजी अरशद मरगूब, सलीम रज़ा, हसन अब्बास, मोहम्मद मियां, शावेज़ नक़वी, मुशीर हैदर, तहसीन रज़ा, खुर्शीद अख्तर कल्लू, सलमान, शब्बर अक़ील, अली साबिर, इबाद रिज़वी, अयाज हुसैन, मोहम्मद जुनैद, सुहेल अली, मोहम्मद जावेद, राशिद, सफीर हैदर, सोनू नक़वी, सैफू, शादाब हसन, राहिल, कलीम वारसी, रज़ी हैदर, शारिब नक़वी, मोहम्मद अहमद सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर गमे हुसैन मनाया।






