October 24, 2026
IMG-20261014-WA0329

राष्ट्र पटल संवाद

इटावा। अंजुमन फिदायाने रसूल ﷺ, इटावा के अध्यक्ष मौलाना वसीम कासमी और जनरल सेक्रेटरी मौलाना तारिक शम्सी ने अपने संयुक्त बयान में घोषणा की है कि पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी अंजुमन की ओर से ‘इस्लामी क्विज़ 2026’ के अंतर्गत दीनी मालूमात का इनामी मुकाबला आयोजित किया जा रहा है। इस मुकाबले का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी में इस्लामी शिक्षाओं की जानकारी, दीनी व इस्लामी मूल्यों के प्रति लगाव और दीनी इल्म हासिल करने का शौक पैदा करना है।

उन्होंने बताया कि इस बार मुकाबला लिखित और मौखिक, दोनों रूपों में आयोजित होगा। लिखित मुकाबला 15 नवंबर 2026 को, जबकि मौखिक मुकाबला 21 और 22 नवंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। मुकाबले में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की हौसला अफजाई के लिए हजारों रुपये के इनामात, प्रमाण-पत्र और ट्रॉफियाँ दी जाएँगी। उल्लेखनीय है कि इस मुकाबले में भाग लेने के लिए कोई रजिस्ट्रेशन फीस निर्धारित नहीं की गई है।
लिखित मुकाबले के लिए उम्मीदवारों को दो समूहों सीनियर और जूनियर में विभाजित किया गया है।
सीनियर ग्रुप में 15 वर्ष से अधिक आयु के उम्मीदवार भाग ले सकेंगे।
जबकि जूनियर ग्रुप में 15 वर्ष तक की आयु के उम्मीदवार भाग ले सकेंगे।

लिखित मुकाबले में छात्राओं को भी भाग लेने की अनुमति होगी, जबकि मौखिक मुकाबले में केवल 15 वर्ष तक की आयु के लड़के ही भाग लेने के पात्र होंगे।

मुकाबले में भाग लेने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। सभी उम्मीदवारों और संबंधित संस्थानों से अपील की गई है कि वे निर्धारित तिथि से पहले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर लें।

मौलाना वसीम कासमी और मौलाना तारिक शम्सी ने अपने संयुक्त बयान में इस बात पर जोर दिया कि इस्लामी और दीनी तालीम नई पीढ़ी की बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक तरबियत में बुनियादी महत्व रखती है। आज के दौर में बच्चों और युवाओं को जहाँ आधुनिक शिक्षा से सुसज्जित करना आवश्यक है, वहीं उन्हें कुरआन-ए-करीम, हदीस-ए-नबवी, सीरत-ए-रसूल ﷺ, बुनियादी अकीदों, इबादतों, इस्लामी अखलाक तथा दीनी और सामाजिक जिम्मेदारियों से परिचित कराना भी समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि दीनी मालूमात के ऐसे मुकाबले केवल इनाम हासिल करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि बच्चों में दीन सीखने का शौक पैदा करने, इस्लामी इतिहास और सीरत-ए-तैयबा से संबंध मजबूत करने, अध्ययन की आदत विकसित करने तथा स्वस्थ शैक्षिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का एक प्रभावी साधन हैं। इन मुकाबलों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी दीनी जानकारी परखने, उसमें सुधार करने और अधिक इल्म हासिल करने की प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने आगे कहा कि नई पीढ़ी की सही दीनी तरबियत माता-पिता, शिक्षकों, मदरसों, मकतबों और शैक्षिक संस्थानों की संयुक्त जिम्मेदारी है। बच्चों के अंदर इस्लामी शिक्षाओं के प्रति प्रेम, अच्छे अखलाक, सच्चाई, अमानतदारी, माता-पिता का सम्मान, शिक्षकों की कद्र और खिदमत-ए-खल्क का जज्बा पैदा करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। दीनी तालीम से सुसज्जित पीढ़ी न केवल अपने दीन और ईमान की हिफाजत करती है, बल्कि समाज में नैतिकता, भाईचारे, सहिष्णुता और जिम्मेदारी की सकारात्मक प्रवृत्तियों को भी बढ़ावा देती है।

अंजुमन के अध्यक्ष मौलाना वसीम कासमी और जनरल सेक्रेटरी मौलाना तारिक शम्सी ने संयुक्त रूप से सभी मदरसों, मकतबों, स्कूलों, शैक्षिक संस्थानों, इमामों, शिक्षकों और अभिभावकों से विशेष अपील की है कि वे अपने-अपने संस्थानों और घरों से अधिक से अधिक बच्चों को इस मुकाबले में भाग लेने के लिए तैयार करें। उन्होंने कहा कि इस तरह की शैक्षिक और दीनी गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी से न केवल उनके ज्ञान में वृद्धि होती है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और क्षमताओं में भी निखार आता है।

उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे इस दीनी और शैक्षिक गतिविधि के प्रचार-प्रसार में सहयोग करें, ताकि अधिक से अधिक बच्चे इससे लाभान्वित हो सकें। अंजुमन की ओर से आयोजित किया जाने वाला यह मुकाबला नई पीढ़ी में दीनी जागरूकता पैदा करने और इस्लामी शिक्षाओं के साथ उनके संबंध को मजबूत बनाने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है।

अंजुमन के जिम्मेदारों ने उम्मीद जताई कि मदरसों, मकतबों, शैक्षिक संस्थानों, अभिभावकों और शुभचिंतकों के सहयोग से इस्लामी क्विज़ 2026 को सफल बनाया जा सकेगा और नई पीढ़ी में दीनी इल्म हासिल करने का शौक और अधिक बढ़ेगा। इस अवसर पर प्रतियोगिता के कोऑर्डिनेटर मौलाना सैयद मोहम्मद साद कासमी कासमी और सह कोऑर्डिनेटर मौलाना मोहम्मद आतिफ रहमानी भी मौजूद थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *