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चंबल के उद्गम से अंत तक की समग्र यात्रा 10 फरवरी से

राष्ट्र पटल संवाद

उदी (इटावा)। आखिर चम्बल के दोनों मुहानों पर बसे तीन प्रदेशों के करीब 21 जनपदों की लाखो जनसंख्या के रूखे गले को सीचने और उनके विकास की मांग को लेकर उठती आवाज बुलंद होने लगी है। जिसमें चंबल विकास यात्रा समिति ने इंदौर के समीप स्थित चंबल के उद्गम स्थल से अंतिम मुहाने इटावा के भरेह पचनद स्थल तक की यात्रा कर तीनों प्रदेशों के मुखिया एवं केंद्र सरकार को इस क्षेत्र के विकास और उत्थान की आवाज बुलंद करके लोगो को न्याय दिलाने का बीड़ा उठाया है। समिति के संयोजक के संयोजक बढ़पुरा ब्लॉक के गांव अवारी के मूल बाशिंदा राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक सरोकारी ठाकुर जोगिंद्र सिंह भदौरिया है।
अपनी जन्म भूमि से हुंकार भरते हुए उन्होंने बताया कि चंबल नदी का जल भले ही स्वच्छता और स्वास्थ्यता के लिए विख्यात हो लेकिन इस नदी के खार और पठार में जीवन जीने वालो की स्थिति बीमारू है यहां के लोग वीरता और देश प्रेम का बीड़ा उठाकर भले ही आज सरहदों की सीमा सुरक्षा के लिए कुर्बानी देने में अग्रणी भूमिका अदा कर रहे हो लेकिन इस क्षेत्र को आजादी के लम्बे समय बाद भी विकास का रास्ता नहीं मिला। यह स्थिति न केवल एक प्रदेश की है बरन तीन प्रदेश मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान के करीब 21 जनपद इस नदी के किनारे बसे है, जो उपेक्षा का दंश लिए विकास की रह देख रहे है।
वह भी तब जब चंबल की गोदी में जन्मे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने चंबल की माटी की सौंधी सुगंध की अनुभूति पाकर देश के संचालन का जिम्मा संभाला और इस क्षेत्र का नाम रोशन किया तो वहीं मध्यप्रदेश के वर्तमान विधान सभाध्यक्ष व केंद्र के पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी इसी माटी में किलकारी मारी और क्षितिज में चमके वैसे तो सिंधिया परिवार भी इसी माटी के पुरौंधा है। आजादी की जंग के जुझारू तेवर के की वीर नायक कमांडर अर्जुन सिंह भादरिया भी इस माटी में खेल कर बड़े हुए और नाम कमाया ।
आज प्रेस से मुखातिब होते हुए जोगेंद्र सिंह भदौरिया ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि जब इस क्षेत्र के बागी तेवर जो कभी क्षेत्र खार पठार और बीहड़ में दिशा भटक कर रहने को विवश होते थे आज सरकार से अपनी मांग और हक के लिए आगे आए और क्षेत्र के विकास के लिए एक जुट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंबल के उद्गम स्थल जानापाव सतपुड़ा की पहाड़ियों जिन्हें भगवान परशुराम की जन्म स्थली भी कहा जाता है से 10 फरवरी से विशाल यात्रा शुरू की जाएगी जो 970 किलो मीटर बहती चंबल की धारा के कलरव और आसपास के निवासियों के स्तर को विकसित करने की मांग सरकार से रखने के लिए शुरू की जाएगी। जिसमें चंबल क्षेत्र के लिए विकास बोर्ड के गठन एवं सेना के तीनों जल थल वायु क्षेत्र में सेवा व्यवस्था में वरीयता के साथ चयन करने तथा विशेष दर्जा प्रदान कर क्षेत्र के विकास का प्रारूप तैयार करने की मांग की जाएगी। इस यात्रा में तीनों प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा क्षेत्र के की जानी मानी हस्तियों साहित्यकारों, पत्रकारों, समाज सेवियों एवं विभिन्न दलों के लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास है।उन्होंने हर दल और चंबल के किनारे स्थित हर नागरिक से सहभागिता करने की अपील की है।

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