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एम0ए0 खान

रायबरेली (राष्ट्र पटल)। हरचन्दपुर विकास खण्ड के कंडौरा गांव में तहसील प्रशासन द्वारा शुरू की गई कार्रवाई ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। गांव में मो. शमीम, उमा शंकर, रफऊ, कुंदन वर्मा सहित दर्जनों परिवारों के मकानों पर ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा कर दिया गया है, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे बीते लगभग 50 वर्षों से इसी जमीन पर अपने घर बनाकर रह रहे हैं। यहीं उनके बच्चों का जन्म हुआ, यहीं उनकी पूरी जिंदगी गुजर गई। अब अचानक इस जमीन को तालाब की भूमि बताकर खाली करने का आदेश दिया गया है, जिससे परिवारों के सामने छत छिन जाने का संकट खड़ा हो गया है।

तहसील प्रशासन के अनुसार कंडौरा ग्राम की गाटा संख्या 627 राजस्व रिकॉर्ड में तालाब के रूप में दर्ज है। इस भूमि पर बड़ी संख्या में लोगों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। भूमि प्रबंधन समिति द्वारा चस्पा किए गए नोटिस में बताया गया है कि वर्ष 2019 में तहसीलदार न्यायिक द्वारा वाद के माध्यम से बेदखली का आदेश पारित किया जा चुका है। इसी के तहत सभी कब्जेदारों को 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है। समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रशासन द्वारा बलपूर्वक कब्जा खाली कराए जाने की चेतावनी दी गई है।

इस कार्रवाई से गांव के दर्जनों परिवारों के सामने सड़क पर आ जाने की नौबत खड़ी हो गई है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भय और अनिश्चितता के साये में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने रहम नहीं दिखाया तो कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ जाएंगे।

पीड़ित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप कर मामले की दोबारा जांच कराने और वर्षों से बसे परिवारों को बेघर होने से बचाने की गुहार लगाई है। अब देखना यह है कि प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा या इन परिवारों की पीड़ा को समझते हुए कोई राहत का रास्ता निकालेगा।

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