
राष्ट्र पटल संवाद
फर्रुखाबाद। जनपद में बसंत पंचमी के पर्व को लेकर पतंगबाज़ी जोरों पर हैं। वर्षों पुराने रिवाज को जीवंत रखते हुए इस बार भी शहर के आसमान में लाखों पतंगें पेंच लड़ाती नजर आई। इस साल बाजार में विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम वाली पतंगें आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं, जिनकी मांग युवाओं और बच्चों के बीच सबसे अधिक देखी जा रही है।
बाज़ारों में उमड़ी खरीदारों की भारी भीड़
बसंत पंचमी से ठीक पहले गुरुवार को शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में पैर रखने की जगह नहीं मिली। पक्कापुल, रेलवे रोड, सिल्वर साइन गली, नितगंजा, बूरा वाली गली, इस्माइलगंज सानी, घुमना, त्रिपोलिया चौक और बीबीगंज जैसे इलाकों में सुबह से ही पतंग के शौकीनों का जमावड़ा लगा रहा। देर शाम तक लोग अपनी पसंद की पतंगें और मांझा खरीदते नजर आए। दुकानदारों के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन पूरे शहर में “वो काटा-वो काटा” की गूँज सुनाई दी।
महंगाई पर भारी पड़ा पतंगबाजी का जुनून
इस वर्ष पतंगबाजी के शौकीनों की जेब पर महंगाई का असर साफ दिख रहा है। पिछले साल की तुलना में पतंग और मांझे के दामों में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर, जो छह गिट्टी रील की चरखी पिछले साल 540 रुपये में मिल रही थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 600 रुपये हो गई है।
इसके बावजूद, पतंगबाजों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। लोगो ने बताया कि भले ही सद्दल और मांझे के दाम बढ़ गए हैं, लेकिन यह साल में एक बार आने वाला बड़ा शौक है, जिसे वे महंगाई के कारण छोड़ नहीं सकते।
बच्चों की पहली पसंद: कार्टून वाली पन्नी की पतंगें
जहाँ बड़े ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और मांझे के पेंच लड़ाने को बेताब हैं, वहीं बच्चों के लिए कार्टून वाली पन्नी की पतंगें बाज़ार में छाई हुई हैं। दुकानदारों ने बच्चों की रुचि को ध्यान में रखते हुए पन्नी की पतंगों का भारी स्टॉक जमा किया है।
एक नजर बाजार भाव पर:
बाजार में उपलब्ध पतंग और डोर की कीमतें कुछ इस प्रकार हैं:
* कागज की पतंग: ₹2 से ₹10 तक
* पन्नी की पतंग: ₹1 से ₹5 तक
* छह गिट्टी मांझा चरखी: ₹450 से ₹600 तक
* सद्दल गिट्टा: ₹5 से ₹240 तक
* मांझा गिट्टा: ₹10 से ₹350 तक
फर्रुखाबाद में पतंगबाजी का यह सीजन बसंत पंचमी तक अपने चरम पर रहता है, जिससे स्थानीय व्यापारियों को इस साल बेहतर मुनाफे की उम्मीद है।






