अकमल खान
रायबरेली (राष्ट्र पटल)। स्कूलों में एडमिशन का समय नजदीक है और जिला अस्पताल के अंदर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने वालों का इस समय तांता लगा हुआ है। प्रतिदिन सैकड़ो की संख्या में लोग इस पटल पर आते हैं। लेकिन उन्हें समय पर जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में दलाल और बिचौलियों की कमाई काफी बढ़ गई है। निशुल्क सर्विस के एक से डेढ़ हजार रुपए खर्च कर लोग बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। जिसमें विभाग से जुड़े कर्मचारियों के भी शामिल होने की बात कही जा रही है।
आपको बताते चलें कि जो बच्चे जिला अस्पताल में पैदा हुए हैं उनका जन्म प्रमाण पत्र जिला चिकित्सालय से ही जारी होता है। नियमानुसार प्रमाण पत्र जारी होने की समय सीमा 21 दिन के अंदर होती है। लेकिन अस्पताल के अंदर बैठे कर्मचारी लोगों को तीन-तीन महीने इस प्रमाण पत्र के लिए चक्कर लगवा रहे हैं। सूत्रों की माने तो दलाल और बिचौलियों के माध्यम से जो आवेदन होता है उसे जल्द से जल्द जारी करने की कोशिश की जाती है। आवश्यकता के हिसाब से लोगों से सुविधा शुल्क लिया जाता है। जिनको तत्काल जरूरत होती है उनके रेट ज्यादा है। जिन्हें बहुत खास जरूरत नहीं होती उनको 100-200 रुपए में भी प्रमाण पत्र मिल जाता है। इधर स्कूलों में एडमिशन का समय आ गया है और दाखिला लेने के लिए जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। ऐसे में जिले भर से लोग बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। लेकिन उन्हें अस्पताल में बैठा स्टाफ दलाल और बिचौलियों को माध्यम बनाने के लिए चक्कर लगवा रहा है। सूत्रों का कहना है कि ऐसे सैकड़ो उदाहरण है जिनका सुविधा शुल्क के अभाव में प्रमाण पत्र लटकाया गया। भी किसी के विपरीत जो आवेदन दलाल और बिचौलियों के माध्यम से काउंटर पर आए हैं उनको एक सप्ताह के भीतर भी प्रमाण पत्र निर्गत किया गया है। उच्च अधिकारी अगर चाहे तो आवेदन और प्रमाण पत्र निर्गत करने की तारीखों का मिलान करके इस पूरी अवैध कमाई का भंडाफोड़ कर सकते हैं। लेकिन इस काउंटर पर स्वास्थ्य विभाग के किसी बड़े अधिकारी का ध्यान नहीं जा रहा है। यही कारण है कि कर्मचारी खुलेआम मनमानी कर रहे हैं। प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए ना कोई नियम है और ना ही कोई व्यवस्था। यहां के कर्मचारी जब जिसे चाहते हैं उसको प्रमाण पत्र निर्गत करके दे देते हैं। नागरिकों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे पटल की विस्तृत जांच कर कर जो भी दोषी कर्मचारी हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य का ध्यान रखते हुए 21 दिन के अंदर जल्द से जल्द प्रमाण पत्र निर्गत करने की व्यवस्था सुनिश्चित हो।






