
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अपील पर प्रतिदिन पौधरोपण का संकल्प, विश्वविद्यालय बनेगा ‘हरित परिसर’
दीपा ठाकुर
नई दिल्ली (राष्ट्र पटल)। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में शुक्रवार को तृतीय दीक्षांत समारोह गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 365 विद्यार्थियों को उपाधियां और 15 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए।
शिवराज सिंह चौहान ने “भारत माता की जय” और “झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जय” के उद्घोष के साथ अपना संबोधन शुरू करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का अंत नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के नए अध्याय का प्रारम्भ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत वैश्विक सम्मान प्राप्त कर रहा है और अब युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे अपने ज्ञान, कौशल और संस्कार से देश, समाज और विश्वविद्यालय का नाम रोशन करें। उन्होंने गुरु–शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए सत्यनिष्ठा, समर्पण और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प को सफलता की आधारशिला बताया।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज भारत खाद्यान्न के लिए किसी भी देश पर निर्भर नहीं है और यह आत्मनिर्भरता परिश्रमी किसानों एवं कृषि वैज्ञानिकों के योगदान का परिणाम है। उन्होंने ‘पोषणयुक्त भारत’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि अब केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण एवं पोषण-संतुलित फसलों को बढ़ावा देना समय की मांग है, ताकि खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा भी सुदृढ़ हो सके।
श्री चौहान ने कहा कि बुंदेलखण्ड की धरती तिलहन और दलहन क्रांति का केंद्र बनने की अपार संभावनाएं रखती है। झांसी कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्होंने दालों के आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए बुंदेलखण्ड में दलहन फसलों पर केंद्रित विशेष मिशन चलाने की बात कही, जिसमें किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक परामर्श और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की रूपरेखा बताई।
उन्होंने कहा कि भारत को ‘फूड बास्केट’ बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब प्रयोगशालाओं से निकला ज्ञान सीधे खेत तक पहुंचे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि उर्वरक सब्सिडी को पारदर्शी और लक्षित बनाने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सब्सिडी राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 8.5 करोड़ किसानों की फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है और इसे 12 करोड़ तक विस्तार देने का लक्ष्य है। उन्होंने “भारत विस्तार प्लेटफॉर्म” का उल्लेख करते हुए कहा कि इस डिजिटल मंच के जरिए किसानों को फसल, कीट-प्रबंधन, मौसम और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे समय पर वैज्ञानिक सलाह खेत तक पहुंच रही है।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए श्री चौहान ने विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों और किसानों से इसे जीवन शैली का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि वे स्वयं प्रतिदिन एक पौधा लगाने का संकल्प निभा रहे हैं और सभी से कम से कम अपने जन्मदिन पर एक पौधा अवश्य लगाने का आग्रह किया, ताकि विश्वविद्यालय परिसर और आसपास का क्षेत्र अधिक हरित और स्वच्छ बन सके। दीक्षांत समारोह के अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।
समारोह में 235 स्नातक, 127 परास्नातक और 3 पीएच.डी. सहित कुल 365 विद्यार्थियों को उपाधियां तथा 15 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में मात्र 5 विद्यार्थियों से शुरू हुआ विश्वविद्यालय आज 1100 विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है और यहां छात्राओं की संख्या सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ किसानों के लिए तकनीकी परामर्श, प्रशिक्षण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बन चुका है तथा झांसी परिसर के अलावा दतिया में मात्स्यिकी महाविद्यालय एवं पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय प्रारम्भ हो चुके हैं, जबकि मुरैना (मध्य प्रदेश) में उद्यानिकी महाविद्यालय शीघ्र शुरू होगा।
कुलपति ने पॉलीहाउस, हाई-टेक नर्सरी, समेकित कृषि प्रणाली मॉडल, कठिया गेहूं, सरसों एवं चना प्रक्षेत्र तथा फसल कैफेटेरिया जैसे नवाचारों की जानकारी दी और प्रतिदिन पौधरोपण के संकल्प पत्र का वाचन कर उसे केंद्रीय कृषि मंत्री को समर्पित करते हुए विश्वविद्यालय को ‘हरित परिसर’ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।कार्यक्रम का शुभारंभ वंदेमातरम् से हुआ। एनसीसी कैडेट्स ने मुख्य अतिथि को गार्ड ऑफ ऑनर दिया और कृषि विज्ञान मंडपम सहित विभिन्न नवीन भवनों का लोकार्पण किया गया।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने विश्वविद्यालय प्रक्षेत्र में आयोजित किसान चौपाल के माध्यम से किसानों से संवाद किया तथा सरसों एवं चना प्रक्षेत्र और समेकित कृषि प्रणाली मॉडल का अवलोकन किया। समारोह में सांसद झांसी–ललितपुर श्री अनुराग शर्मा, नगर विधायक श्री रवि शर्मा, अन्य जनप्रतिनिधि, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, विश्वविद्यालय के अधिकारी, वैज्ञानिक, शोधार्थी, किसान एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे और पूरे परिसर में उत्सव एवं गौरव का वातावरण रहा।








