अनवर पठान
फर्रुखाबाद (राष्ट्र पटल)। करणी सेना जिलाध्यक्ष ठाकुर मोहन सिंह ने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में एक नया भेदभाव! UGC के नए नियमों के तहत अब कॉलेजों में बनने वाली ‘इक्विटी कमेटी’ में सामान्य वर्ग के लिए कोई अनिवार्य जगह नहीं है। क्या प्रशासन यह मान चुका है कि सामान्य वर्ग के छात्र या शिक्षक पीड़ित नहीं हो सकते?
न्याय का तराजू सबके लिए बराबर होना चाहिए। अगर कमेटी में केवल विशेष वर्गों के लोग होंगे, तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है? यह नियम सामान्य वर्ग के अधिकारों का हनन है और संस्थानों में गुटबाजी को बढ़ावा देगा।
इस भेदभावपूर्ण नीति का विरोध होना चाहिए!
सवर्णों अपनी आवाज उठानी चाहिए मोहन सिंह ने यह भी कहा है कि अभी तक हम लोग दूसरे लोगों पर आरोप लगाते थे हिन्दुओं को बाट दिया जाता है अब यह काम भाजपा की मोदी सरकार कर रही है और बांटने का उद्देश्य क्या होगा अगर किसी ने कोई एसी बात करी जो व्यौहार में गड़बड़ है तो वो कमेटी एक्शन लेगी किसके खिलाफ जो जनरल कैटगरी का कैंडिडेट है अगर वो चीज सही पाई जाती है तो 3 साल की सजा तक का प्रावधान कर दिया गया है और यानी व्यवहार में गड़बड़ी, यानी अगर एक गुट का एक लड़का जनरल गुट की लड़की को प्रपोज करता है अगर वो लड़की मना कर दे और वो उस कमेटी से कह दे सर इन्होंने भेद भाव कर दिया मेरे साथ तो उसके बाद उसको जेल हो जाएगी क्योंकि उसने मना क्यों कर दिया!सिंह ने कहा कि जैसे कांग्रेस ने कम्नूनेटी वायरेंस बिल लाई थी जिससे एक तरफ हिन्दू एक तरफ मुसलमान थे, दंगों का दोषी केवल हिन्दू होगा उससे जद्दा डेंजरस ये मोदी जी परिवजन लेके चले आए पूरा समाज तीतर भीतर हो जाएगा, वट जाएगा इससे जद्दा दुर्दशा करने वाला कदम स्वर्ण के लिए कोई भी नहीं हो सकता, अब मोदी सरकार अपना गढ़ा खुद खोद रही है करणी सेना जिलाध्यक्ष मोहन सिंह ने यह भी कहा है कि जब मोदी सरकार किसानों के खिलाफ बिल लेके आई थी तब देश के किसानों ने एक जुट होकर संशोधन कराने का काम किया था उसी तरफ स्वर्ण समाज को एक जुट होकर यूजीसी के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।






