
राष्ट्र पटल संवाद
इटावा। कर्बला में आशूर के दिन इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादतों के गम में इमाम बारगाह घटिया अज़मत अली में राहत हुसैन रिज़वी व इमाम बारगाह आलमपुरा में शारिक सगीर शानू की ओर से शामें गरीबां की मजलिसों का आयोजन कर शहीदाने कर्बला को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।
इमाम बारगाह घटिया अज़मत अली में मजलिस में तकरीर करते हुए मौलाना अनवारुल हसन जैदी ने कहा इमाम हुसैन की शहादत के बाद जालिमों ने खेमों में आग लगा दी और इमाम हुसैन के घर की औरतों की चादरें छीन लीं। चौथे इमाम हजरत जैनुल आबेदीन ने अपनी फुफी जैनब से कहा जान बचाने वाजिब है। सब लोग खेमों से बाहर निकल आये और इमाम हुसैन के घर की औरतों और बच्चों ने जंगल मे रात गुजारी। इसके बाद जालिमों ने उन्हें कैदी बना लिया। मजलिस में अख्तर अब्बास, सलीम रज़ा ने सोजख्वानी और अहमद जाफर ईरानी ने नोहा ख्वानी की। इमाम बारगाह आलमपुरा में मजलिस में तकरीर करते हुए मौलाना सैयद अली मेहदी नजफी ने कहा आशूर की रात कयामत की रात है। आशूर के शाम तक सब शहीद हो गए हुसैन अकेले बचे। इमाम हुसैन को आखिर में जालिमों ने बड़ी बेदर्दी से शहीद किया। जब खेमों में आग लगा दी गई जनाबे जैनब घर के लोगों को जंगल मे ले आई और उन्हें सुला दिया और पहरा दिया। मजलिस में मुजाहिद हैदर, अख्तर अब्बास, अली, शम्स अली हसन ने कलाम पेश किए और राहिल सगीर व कैफ वारसी ने नोहा ख्वानी की। शावेज़ नक़वी ने बताया कि आज 28 जून को दिन इतवार को रात 8.30 इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला के तीजे पर शरीफ मंजिल सैदबाड़ा में मो. अतीक और शीश महल स्थित सईद नक़वी के मकान पर रात 8 बजे महिलाओं की मजलिस होगी।






