लड़कियों के होम के बाद मुमताज यतीमखाना भी बंद हो गया
राष्ट्र पटल संवाद
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में एक सदी से भी ज्यादा समय से जनसेवा कर रही सामाजिक संस्था अंजुमन इस्लाह मुस्लिमीन (रजिस्टर्ड) के इतिहास में एक काला दिन आ गया है। आज, 30 जून, 2026 को 1908 से चल रहा मुमताज यतीमखाना भी बंद हो गया । इससे पहले, 11 मार्च, 2022 को संस्था के सचिव ने बेसहारा और अनाथ लड़कियों के रहने, पढ़ाई, ट्रेनिंग और मदद के लिए चलाए जा रहे बैतुनिसवां (महिला गृह) को खुद से बंद करने की सिफारिश की थी, जिसे मंजूरी मिल गई और आज, 30 जून, 2026 को एक सदी से भी ज्यादा पुराना अनाथालय भी बंद हो गया। अंजुमन के सदस्यों और संबंध रखने वालों ने इस कदम पर गहरी चिंता जताते हुए इसे अफसोस नाक कदम बताया है। संस्था की जनरल असेंबली के सदस्य डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी, मसूद आलम जिलानी, हाजी खालिद हलीम खान, इंतिखाब जिलानी, मोहम्मद हलीम एडवोकेट, इरशाद कमर, नजम जफर एडवोकेट, मुहम्मद गफरान नसीम, सैयद हुसैन हाशमी आदि ने अनाथालय बंद होने पर गहरा अफसोस जताते हुए कहा कि पूर्वजों ने बड़ी मेहनत और संघर्ष से इस संस्था को स्थापित किया था। बैरिस्टर मुमताज हुसैन ने अनाथ बच्चों की देखभाल शुरू की थी और 1908 में अंजुमन की स्थापना के बाद इसकी जिम्मेदारी अंजुमन के पास आ गई। संस्था ने उनकी पहल और सेवाओं को देखते हुए अनाथालय का नाम बैरिस्टर मुमताज हुसैन के नाम पर रखा था। तब से, उसके तहत अनाथालय में सैकड़ों बच्चों को रहने, पढ़ाने, ट्रेनिंग देने और मदद दी जा रही थी। यहां से पढ़े-लिखे छात्र देश-विदेश में सेवा कर रहे थे। इसके साथ ही, पिछली सदी के आखिर, 1999 में, संस्था ने बेसहारा, अनाथ लड़कियों की देखभाल, सुरक्षा, पढ़ाई-लिखाई और ट्रेनिंग के लिए एक महिला गृह भी बनाया था। जहाँ से कई लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई और ट्रेनिंग के बाद, संस्था द्वारा सरकारी देखरेख में उनकी शादियाँ भी करवाई गईं। लेकिन 6 मार्च, 2022 को संस्था की नई मैनेजिंग कमेटी के चुनाव के तुरंत बाद, इसके नए सेक्रेटरी ने 11 मार्च, 2022 को एक एफिडेविट में, संस्था के पास फंड न होने का हवाला देते हुए सरकारी डिपार्टमेंट से महिला गृह को बंद करने की सिफारिश की। हालाँकि संस्था के पास फंड की कोई कमी नहीं थी। इसके बाद, संस्था में लगातार नियम विरूद्व कार्यों का सिलसिला चलता रहा।
संस्था की मैनेजिंग कमेटी का टर्म 5 मार्च, 2025 को खत्म हुआ, कोई नया मैनेजर नहीं चुना गया। यहाँ तक कि संस्था का रजिस्ट्रेशन का समय (फर्म एंड रजिस्टर सोसाइटी के ऑफिस में) भी 9 अक्टूबर, 2025 को खत्म हो गया। नए चुनाव न होने की वजह से रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं हो सका। आखिर में, अनाथालय का रजिस्ट्रेशन नहीं बढ़ाया जा सका और इसे बंद कर दिया गया। ध्यान रहे कि अंजुमन द्वारा चलाए जा रहे अनाथालय की देखरेख में बच्चों की पढ़ाई के लिए अंजुमन ने मुमताज बेसिक स्कूल, मुमताज इंटर कॉलेज और मुमताज डिग्री कॉलेज भी बनाए थे। ये सभी संस्थाएं अनाथालय की वजह से हैं। अनाथों के भरण-पोषण में मदद के लिए समाजसेवी लोगों और महिलाओं ने अपनी संपत्ति दान की, जिसकी कमाई इन अनाथों के लिए होती थी। लेकिन मौजूदा कमेटी के पदाधिकारियों ने अपने फायदे के लिए न सिर्फ महिला आश्रम, मुमताज अनाथालय को बंद कर दिया, बल्कि अनाथों के हक के लाखों रुपये भी उस गैर-जरूरी मुकदमे्र में खर्च कर रहे हैं। जो खुद सेक्रेटरी ने किया है। सभी रहम दिल लोगों से अपील है कि वे अंजुमन इस्लाहुल मुस्लिमीन की संस्थाओं और संपत्तियों की सुरक्षा, बचाव और बहाली के लिए आगे आएं।






