
पुरुषोत्तम मास के समापन पर राधा वल्लभ मंदिर में रही कार्यक्रमों की धूम
राष्ट्र पटल संवाद
इटावा। सोमवती अमावस्या और पुरुषोत्तम मास के संपन्न होने पर शहर के छैराहा स्थित वृंदावन धाम श्री राधाबल्लभ मंदिर पर जहां ठाकुर जी के दरबार में फूल बंगला सजाया गया वहीं भक्तों ने युगल सरकार को नौका विहार भी कराया। इस मौके पर मंदिर में भजन कीर्तन की धूम रही और भंडारे का प्रसाद भी वितरित किया गया। नौका विहार उत्सव और ठाकुर जी के फूल बंगले का दर्शन करने को मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।
श्री राधाबल्लभ मंदिर पर सभी उत्सव वृंदावन धाम की परंपरा के अनुसार मनाए जाते हैं।हर साल शरद पूर्णिमा पर ठाकुर जी को चंद्रमा की रोशनी में जहां शरद बिहार कराया जाता है वहीं पुरुषोत्तम मास के संपन्न होने पर प्रथम वार ठाकुर जी का नौका विहार उत्सव मनाया गया। यहां पर पुरुषोत्तम मास में साल भर के सभी त्यौहार भी परंपरा गत ढंग से मनाए गए थे। ठाकुर जी के चरण सेवक गोपाल प्रकाश चंद्र गोस्वामी ने सुबह भगवान का पूजन अर्चन करने के बाद जहां विशेष श्रृंगार किया वहीं ठाकुर जी के दरबार में विभिन्न प्रकार के खुशबूदार फूलों से फूल बंगला भी सजाया गयाऔर विभिन्न प्रकार के फलों के साथ जूस अर्पित किए गए।
युगल सरकार को नौका विहार कराने के लिए ठाकुर जी के गर्भ ग्रह के बाहर एक विशेष छोटा तालाब बनाया गया था पानी से भरे तालाब में गुलाब कमल बेला अन्य प्रकार के फूलों की पत्तियां व इत्र भी डाला गया था। तालाब में डाली गई सजी धजी नाव के ऊपर जब युगल सरकार को नौका विहार के लिए विराजमान किया गया तो पूरा मंदिर परिसर जय जय श्री राधे के जय घोष से गुंजायमान हो उठा। बारी-बारी से भगवान की नौका को तालाब में भ्रमण कराकर अपने को धन्य माना।इस दौरान मंदिर परिसर में भजन कीर्तन की भी खूब घूम रही भक्तों के ऊपर भी इत्र की फुहारें उड़ायी गयीं। गोपाल प्रकाश चंद्र गोस्वामी और प्रथम शर्मा ने सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया ।
ठाकुर जी के चरण सेवक गोपाल प्रकाश चंद्र गोस्वामी ने फूल बंगला और नौका विहार उत्सव का महत्व बताते हुए कहा कि गर्मी के दिनों में ठाकुर जी को शीतल सेवा दी जाती है इसी लिए फूल बंगला सजाया जाता है। फूलों की ठंडक और खुशबू से भगवान को काफी प्रसन्नता होती है। भगवान कृष्ण का एक नाम सौंदर्य भी है फूल बंगले में ठाकुर जी के रूप को निहार कर श्रद्धालुओं का मन पवित्र होता है।नौका विहार उत्सव युगल सरकार की जल क्रीड़ा लीला है शास्त्रों में इसे चंदन यात्रा भी कहते हैं शास्त्र कहता है कि जीवन एक समंदर है राधा कृष्ण की नौका भक्ति की नौका है जो भक्त श्रद्धा से नौका खींचता है और दर्शन करता है वह भव सागर से पार हो जाता है ।






