
शहर के विभिन्न इमामबाड़ों और मकानों पर हुईं मजलिसें
राष्ट्र पटल संवाद
इटावा। पांच मोहर्रम को शहर के विभिन्न इमामबाड़ों और मकानों पर शहीदाने कर्बला की शहादत के गम में मजलिसों का आयोजन किया गया।
आलमपुरा इमाम बारगाह और दरगाह मौला अब्बास महेरे पर रज़ी हैदर की ओर से आयोजित मजलिस में तकरीर करते हुए मौलाना सैयद अली मेहदी ज़ैदी नजफी ने कहा कि मोहर्रम वो महीना है जिसमे हुसैनियत को फतह हासिल हुई और जालिमों को हार मिली। कर्बला में 72 हुसैनी लाखों की फौज पर भारी पड़े। कर्बला वो जगह है जहां हुसैन की जियारत पर जाने वालों के गुनाह माफ होते हैं। इमाम हुसैन का रास्ता कामयाबी और निजात का रास्ता है। इमाम हुसैन ने मदीना छोड़ते वक्त वसीयत में अपना मकसद बता दिया था। उन्होंने कहा कि अगर मौला अली न होते तो दुनिया को यह भी पता न होता कि रसूल के कितने असहाब हैं। उन्होंने कहा अम्र बिन मारूफ पर अमल करना हर हुसैनी की जिम्मेदारी है। शावेज़ नक़वी ने बताया कि इसके अलावा पककी सराये स्थित बड़े इमामबाड़े, शरीफ मंजिल सैदबाड़ा स्थित राहत अक़ील के कदीमी इमामबाड़े, मिश्री टोला में रज़ी हैदर के मकान पर आयोजित मजलिसों में मौलाना अनवारुल हसन ज़ैदी, घटिया अज़मत अली इमामबाड़े व घटिया अज़मत अली स्थित समर अब्बास नकवी के मकान पर आयोजित मजलिसों में मौलाना सैयद डा. एजाज़ अली बिहार ने तकरीर की। नोरंगाबाद वक्फ तमीजन व काजमी में मुतवल्ली राहत हुसैन रिज़वी की ओर से मजलिस हुई। मजलिसों में सलीम रज़ा, जहूर नक़वी, सफीर हैदर ने सोजख्वानी, तनवीर हसन, राहिल सगीर, अख्तर अब्बास ने नोहा ख्वानी की।






