September 12, 2026

कच्चे के कारोबारी फैला रहे हैं भ्रम : पारस जैन

3.5% मेकिंग चार्ज और पारदर्शी व्यापार से बौखलाया बिचौलिया वर्ग

राष्ट्र पटल संवाद

इटावा। सोने की शुद्धता, हॉलमार्किंग मानकों और मेकिंग चार्ज को लेकर बाजार में फैलाई जा रही अफवाहों पर इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) एडवाइजरी कमेटी उत्तर प्रदेश व इटावा के प्रेसिडेंट तथा ‘गहना ज्वेलर्स’ के संचालक पारस जैन ने कड़ा रुख अपनाया है।उन्होंने भ्रामक गणित और अधूरी जानकारी के जरिए जनता को गुमराह करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट किया कि 22K (92%) हॉलमार्क और पारदर्शी बिलिंग से डरने वाले ही ऐसी मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रहे हैं।पारस जैन ने स्पष्ट किया कि 22 कैरट हॉलमार्क की शुद्धता का असली मानक 92% (92% शुद्धता) है।बाजार में कुछ लोग शुद्धता के इस वास्तविक मानक पर बेबुनियाद सवाल उठाकर ग्राहकों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

पारदर्शी मानक: 22K (92% शुद्धता) + 3.5% न्यूनतम मेकिंग चार्ज + 100% BIS हॉलमार्क HUID

हर खरीद पर 100% पक्का जीएसटी बिल, जिसमें किसी भी प्रकार का कोई छुपा हुआ शुल्क (Hidden Charges) नहीं है।भारी-भरकम 20% तक मेकिंग चार्ज वसूलने और कच्चे बिल का खेल खेलने वालों की दुकानदारी अब बंद होने की कगार पर है, जिसके चलते वे इस तरह का दुष्प्रचार कर रहे हैं।

कच्चे के धंधे का भविष्य शून्य, पक्का बिल ही सुरक्षा की गारंटी’

ग्राहकों को जागरूक करते हुए पारस जैन ने कहा कि सादा पर्ची या कच्चे में सोना खरीदने का कोई कानूनी आधार या सुरक्षित भविष्य नहीं है।उन्होंने कहा कि ग्राहक हमेशा RTGS,बैंक ट्रांसफर या डिजिटल माध्यम से पक्का जीएसटी बिल लेकर ही सोना खरीदें।पक्का बिल और सही मानक ही ग्राहक की गाढ़ी कमाई की असली सुरक्षा हैं,जो लोग 3.5% मेकिंग चार्ज और पूर्णतः बैंकिंग आधारित लेनदेन के खिलाफ हैं,वे केवल अपनी अवैध व मनमानी कमाई को बचाने की जुगत में लगे हैं।

कैरटमीटर पर परखें शुद्धता,0.1% की भी कमी मिले तो दें जवाब

पारस जैन ने भ्रामक खबरें फैलाने वालों को खुला चैलेंज देते हुए कहा कि दुकान पर आइए 22K का आभूषण लीजिए और अधिकृत सरकारी कैरटमीटर पर 92% शुद्धता की स्वयं जांच कीजिए। यदि 3.5% मेकिंग चार्ज और RTGS के पक्के बिल के साथ दी गई शुद्धता में 0.1% की भी हेराफेरी मिले,तो जो कहेंगे वह हारने को तैयार हैं,साथ ही उन्होंने कहा कि अखबारों में मनगढ़ंत गणित छपवाने के बजाय ऐसे लोगों को पहले मानकों और शुद्धता का असली गणित सीखना चाहिए।

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