
राष्ट्र पटल संवाद
मथुरा। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु मैं परिषद को बढ़ावा देने की यात्रा पर गए परिषद के चेयरमैन डॉ अरविंद चित्तौड़िया ने आज मथुरा पहुंचने पर परिषद के साथिओं से वार्ता कर परिषद के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जोर दिया जिसमे परिषद के राष्ट्रीय प्रशाशनिक सचिव नीलेश अवस्थी जी ने भी हामी भरी।
परिषद लगातार अपने कार्यों से सभी को अवगत कर रहा है की किसी भी सशक्त और विकसित राष्ट्र की नींव उसकी मजबूत कानून-व्यवस्था और सुरक्षित सामाजिक परिवेश पर टिकी होती है।
इस दिशा में **राष्ट्रीय अपराध रोकथाम परिषद (National Crime Prevention Council – NCPC)** एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में कार्य कर रहा है।
अपराधों की रोकथाम, जेलों में बंद कैदियों के सुधार और राष्ट्र निर्माण में इस परिषद की भूमिका लगातार रेखांकित की जा रही है। यह परिषद समाज को सुरक्षित बनाकर देश की प्रगति में योगदान दे रही है. राष्ट्रीय अपराध रोकथाम परिषद प्राथमिक उद्देश्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, अपराध को होने से पहले ही रोकना है।
समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को अपराधों, साइबर ठगी और नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना। पुलिस और आम जनता के बीच की दूरी को कम करना ताकि नागरिक बिना किसी डर के अपराधों की सूचना दे सकें।आधुनिक युग के डिजिटल अपराधों (Cyber Crimes) से निपटने के लिए उन्नत तकनीकों और डेटा एनालिसिस का उपयोग करना।
सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अपराध नियंत्रण के लिए व्यावहारिक और प्रभावी नीतियां बनाने में परामर्श देना। जेलों में बंद अपराधी की सजा नहीं, सुधार पर जोर जरुरी है। NCPC का मानना है कि जेलें केवल सजा भुगतने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार गृह होनी चाहिए। जेलों में बंद कैदियों को जेल के भीतर ही कारपेंट्री, सिलाई, कंप्यूटर कोडिंग, और हस्तशिल्प जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि रिहाई के बाद वे सम्मानजनक आजीविका कमा सकें और दोबारा अपराध की दुनिया में न लौटें।
अपराधियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए नियमित रूप से मनोवैज्ञानिकों द्वारा काउंसलिंग और योग-ध्यान सत्रों का आयोजन किया जाता है। युवा कैदियों को अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने के लिए दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। अपराधों की रोकथाम और राष्ट्र निर्माण में भूमिका एक सुरक्षित समाज सीधे तौर पर देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति से जुड़ा होता है। राष्ट्र निर्माण में परिषद का योगदान अतुलनीय है।
अपराध दर कम होने से देश में विदेशी निवेश (FDI) बढ़ता है और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने में होने वाले भारी-भरकम खर्च को बचाकर देश के बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य-शिक्षा पर खर्च किया जा सकता है। भटके हुए युवाओं और आदतन अपराधियों को मुख्यधारा में वापस लाकर देश की ‘मानव पूंजी’ को बर्बाद होने से बचाती है।
जेल से छूटे सुधरे हुए अपराधी जब देश के विकास में श्रम और कौशल का योगदान देते हैं, तो यह राष्ट्र निर्माण की एक बड़ी जीत होती है।
अपराधों की कमी से समाज में आपसी अविश्वास खत्म होता है और भाईचारा बढ़ता है। एक सुरक्षित माहौल महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को समान अवसर और स्वतंत्रता प्रदान करता है, जो एक विकसित राष्ट्र की पहली शर्त है।
राष्ट्रीय अपराध रोकथाम परिषद केवल अपराधियों को पकड़ने या सजा दिलाने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच को बदलने का एक आंदोलन है।
जेलों को सुधार गृहों में बदलना और अपराधों पर समय रहते लगाम लगाना ही वह रास्ता है, जो भारत को एक सुरक्षित, समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र बनाने की ओर ले जाता है।





