एआईएमआईएम यूथ जिलाध्यक्ष गुलशेर का पलटवार

राष्ट्र पटल संवाद 

इटावा। सपा के खोखले डर और वोट बैंक की राजनीति पर एआईएमआईएम यूथ के जिलाध्यक्ष मोहम्मद गुलशेर का करारा पलटवार करते हुए कहा कि इटावा किसी की बपौती नहीं, यह बदलाव की धरती है। जो लोग हमें वोट काटने वाली मशीन कह रहे हैं, असल में उनकी अपनी राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है।

सपा नेता फरहान शकील का बयान उनकी राजनीतिक हताशा और इस डर को दिखाता है कि अब मुस्लिम समाज जाग चुका है और वह किसी का बंधुआ मजदूर या मूक वोट बैंक बनकर नहीं रहेगा। जसवंतनगर और भरथना का सच सपा ने सिर्फ वोट लिया, नेतृत्व क्यों नहीं दिया सपा नेता कहते हैं कि इटावा उनका गढ़ है। हम पूछना चाहते हैं जसवंतनगर और भरथना की जनता ने दशकों तक सपा को एकतरफा वोट दिया। लेकिन बदले में अल्पसंख्यक समाज को क्या मिला जब विकास की बात आती है, जब युवाओं को रोजगार की बात आती है, या जब दंगों और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की बात आती है, तो सपा के बड़े नेता जमीन से गायब क्यों हो जाते हैं इटावा और भरथना का मुसलमान अब सिर्फ दरी बिछाने और जिंदाबाद के नारे लगाने के लिए तैयार नहीं है। हम यहाँ वोट काटने नहीं, बल्कि मुस्लिम-दलित-पिछड़ा गठबंधन बनाकर अपना हक और राजनीतिक नेतृत्व डीलरशिप छीनने आए हैं।

सपा का यह पुराना रोना है कि एआईएमआईएम लड़ेगी तो भाजपा जीतेगी। जवाब सीधा है जब प्रदेश में एआईएमआईएम मजबूती से नहीं लड़ रही थी, तब लोकसभा और विधानसभा चुनावों में सपा भाजपा से क्यों हार गई क्या सपा के बड़े नेताओं के परिवार के लोग खुद चुनाव नहीं हारे तब वोट किसने काटा था सच तो यह है कि सपा की कमजोर, डरी हुई और अवसरवादी राजनीति की वजह से ही भाजपा को फलने-फूलने का मौका मिला। जब संसद में यूएपीए जैसे काले कानूनों पर वोटिंग होती है, तो सपा के सांसद मैदान छोड़ देते हैं, और अकेले असदुद्दीन ओवैसी अल्पसंख्यकों और मजलूमों के हक की आवाज बुलंद करते हैं।

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