
बुलडोजर कार्यवाही को रोके सरकार ,आज़ाद भारत मे ऐसा होना शर्मनाक
जिनकी र्आँखों मे आज़ाद भारत का खुआब देखा और उसे हसील करने को यातनाये सही, अंग्रेजो से जंग कर मोर्चा लिया खिलाफ़त आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक बने जो देश का ऐसा कलमकर पत्रकार बना जिसकी कलम से देश की आज़ादी की ऐसी आग दहकी जिससे अंग्रेजी हुक्मत काँप उठी। मै बात कर रहा हूं। महान आज़ादी के जन नायक देश भगत मौलाना मोहम्मद अली जौहर कि। आज उनके नाम पर बनी एक मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय (Maulana Mohammad Ali Jauhar University) सुर्खियों मे है तासूब नफ़रत की आग मे उस पर बुलडोजर चलने की पूरी तैयारी है। यह बाह पढ़ने बाले बच्चो के भविष्य के साथ खिलबाड़ तो होगा शिक्षा जगत के लिए शर्मनाक होगा। बही यह कार्यवाही भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, शिक्षाविद, का भी अपमान होगा। किया देश पर कुर्बान होने बालो ने धर्म के नाम पर बर्बाद होने के लिए बलिदान दिया था। मै सरकार से कहूंगा। सवाल हिंदू या मुस्लिम का नही सवाल देश के नौजबानो के भविष्य का है। सभी से उपर उठकर रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलने की कार्यवाही को रोके। चाहे तो इसे सरकार अपने अधीन कर इसका संचालन करे। सिर्फ नक्शा न होने पर यह कार्यवाही ठीक नही है।
कौम जन लोगो तुम्हे समझना होगा शिक्षा कितनी जरूरी है। इसका अंदाजा तुम्हे लगाना चाहिए । साथ हि एक जुटता भी जरूरी है। मसलकी,जातीय लड़ाई से उपर उठकर।
इसी के साथ जीबन संक्षिप्त परिचय मौलाना मोहम्मद अली जौहर
नाम: मौलाना मोहम्मद अली जौहर
जन्म: 10 दिसंबर 1878, रामपुर (उत्तर प्रदेश)
वफ़ात: 4 जनवरी 1931, लंदन (इलाज के दौरान)
दफ़्न: मस्जिद-ए-अक्सा के परिसर, यरूशलम (बैतुल मुक़द्दस)
मौलाना मोहम्मद अली जौहर भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, शिक्षाविद, वक्ता और खिलाफ़त आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने अपने भाई मौलाना शौकत अली के साथ मिलकर अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई।
उन्होंने अंग्रेज़ी साप्ताहिक The Comrade और उर्दू अख़बार Hamdard की स्थापना की, जो उस दौर के प्रभावशाली समाचार पत्रों में गिने जाते थे।
प्रारंभिक शिक्षा: रामपुर
अलीगढ़ के मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज (वर्तमान AMU)
ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय (इंग्लैंड)
प्रमुख योगदान
खिलाफ़त आंदोलन का नेतृत्व
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका
बेहतरीन पत्रकार और लेखक
मुस्लिम शिक्षा और राजनीतिक जागरूकता के समर्थक
प्रसिद्ध कथन
“मैं गुलाम भारत में वापस नहीं जाऊँगा। या तो मुझे आज़ादी मिलेगी या मेरी कब्र।”
उनकी मृत्यु लंदन में हुई और उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें मस्जिद-ए-अक्सा के परिसर में दफ़न किया गया।
श्रद्धांजलि
मौलाना मोहम्मद अली जौहर केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि कलम, क़ौम और आज़ादी की आवाज़ थे। उनका जीवन साहस, शिक्षा और संघर्ष का प्रतीक है। अल्लाह तआला उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस अता फ़रमाए। आमीन।”
लेखक : अनवर पठान, बरिष्ठ पत्रकार व लेखक








