
इन दिनों रोजगार दिलाने के नाम पर जालसाज गैंग बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाने के लिए सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और फर्जी वेबसाइटों का सहारा ले रहे हैं। एक ओर देश में बेरोजगारी की समस्या गंभीर होती जा रही है और केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा रोजगार के नए अवसर सृजित करने के दावे खोखले सिद्ध हो रहे हैं। इसीलिए देश के विभिन्न राज्यों से युवा पलायन करके रोजगार की तलाश में दूसरे देशों को जा रहे हैं और जो विदेश जाने का जुगाड़ नहीं कर पाते उनमें से अनेक नौकरी दिलाने का लालच देकर ठगने वाले गिरोहों का शिकार बन रहे हैं। कई बार देश विदेश तक फैले जालसाजों के गिरोह भोले भाले युवाओं को रोजगार दिलाने का झांसा देकर विदेश भेज देते हैं वहां पहुंचने पर पता चलता है कि ठगे गए लेकिन समझौता करना पड़ता है और बेहद निम्न स्तरीय काम रोजगार कर विदेश से लौटने के लिए कई कई साल वहां फंसकर रह जाते हैं।
ठगी के कुछ मुख्य प्रचलित तरीके पंजीकरण शुल्क नौकरी शुरू करने या इंटरव्यू के नाम पर एडवांस पैसों की मांग करना। फर्जी जॉइनिंग लेटर बड़ी कंपनियों या सरकारी विभागों के नकली सील-सिक्के वाले पत्र थमाना। वर्क फ्रॉम होम पार्ट-टाइम टास्क घर बैठे लाइक करें या वीडियो देखें, जैसे काम देकर शुरू में थोड़ा फायदा दिखाना और बाद में बड़ी रकम निवेश कराकर ठग लेना। आए दिन इस तरह की वारदातों की झड़ी लगी है युवाओं को रोजगार के नाम पर ठगी का शिकार बन जाने पर तमाम कैरियर चौपट हो जाता है परिवार की जमा पूंजी ठग लेकर रफूचककर हो जाते हैं इस तरह बेरोजगारों पर दोहरी मार पड़ जाती है। कुछ वारदातों से समझने का प्रयास करें।
आपको बता दें कि 2 जनवरी को अनूपशहर (उत्तर प्रदेश) के एक युवक अंकित कुमार को गृह मंत्रालय में डाटा एंट्री आप्रेटर की नौकरी दिलाने का लालच देकर उससे 16 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप में दिल्ली की एक महिला के विरुद्ध केस दर्ज किया गया।
1 मार्च को नोएडा (उत्तर प्रदेश) में विदेश में ऊंची सैलरी वाली नौकरी दिलवाने का लालच देकर 100 से अधिक लोगों से लगभग 70 लाख रुपयों की ठगी करने वाले 2 जालसाजों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। 13 मार्च को गुरुग्राम में वर्क इंडिया ऐप के जरिए शिस कार्पोरेशन नामक फर्जी कम्पनी बनाकर बेरोजगारों से ट्रेनिंग और वैरीफिकेशन के नाम पर पैसे ऐंठने वाले गिरोह के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज की गई। 30 मार्च को ठाणे (महाराष्ट्र) में एक बेरोजगार युवक को रूस में अच्छी नौकरी दिलवाने का लालच देकर उससे 2.92 लाख रुपए ठगने के आरोप में एक महिला सहित 3 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
5 मई को रायपुर (छत्तीसगढ़) ग्रामीण पुलिस ने सरकारी विभागों में नौकरी दिलवाने के नाम पर 34 लोगों से करोड़ों रुपए की वसूली करने वाले एक शिक्षक और क्लर्क को गिरफ्तार किया। 28 मई को जबलपुर (मध्य प्रदेश) में नौकरी लगवाने का लालच देकर एक युवक से 1.26 लाख रुपए की ठगी मारने का मामला सामने आया। आरोपी स्वयं को नेताओं का करीबी बताकर लोगों से रुपए वसूलता था। 3 जून को खटीमा (उत्तराखंड) में एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दिलवाने का लालच देकर तथा उसे फर्जी नियुक्तिपत्र देकर उससे 21 लाख रुपए ठग लेने के आरोप में पुलिस ने केस दर्ज किया 4 जून को पुणे (महाराष्ट्र) के हिंजवाड़ी फेज-2 स्थित थिंक टैक्नोलॉजी इंडिया नाम की कम्पनी द्वारा सैंकड़ों इंजीनियरिंग ग्रैजुएट्स, फ्रैशर्स और इंटर्स को नौकरी, स्टाइपेंड व स्थायी रोजगार का सपना दिखाकर लाखों रुपए ठग लेने के आरोप में कम्पनी के सी.ई.ओ. हर्षल ठाकरे को गिरफ्तार किया गया जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
5 जून को नोएडा (उत्तर प्रदेश) में होटल मैनेजमैंट के छात्रों को विदेशी क्रूज पर नौकरी दिलाने का लालच देकर 52 लाख रुपयों की ठगी करने का भंडाफोड़ हुआ। ठगों ने सोशल मीडिया विज्ञापनों और फर्जी इंटरव्यू के जरिए छात्रों को जाल में फंसाया था।
5 जून को ही सिरसा (हरियाणा) के नाथूसरी चौपटा गांव में अली मोहम्मद नामक युवक को विदेश में नौकरी दिलवाने का लालच देकर उससे 1.90 लाख रुपए ठगने के आरोप में राजस्थान के एक आरोपी के विरुद्ध पुलिस ने केस दर्ज किया और अब 6 जून को ग्वालियर (मध्यप्रदेश) के महाराजपुरा में एक तांगा चलाने वाले को नगर निगम में नौकरी दिलवाने का लालच देकर उससे 2.25 लाख रुपए ठग लेने के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति के विरुद्ध केस दर्ज किया।
ये तो वे चंद वारदातों हैं जो समाचारपत्रों में प्रकाशित हुए हैं। इनके अलावा भी न जाने ऐसे कितने मामले हुए होंगे जिनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। अतः नौकरी पाने के उतावले पन में नौकरी दिलवाने का दावा करने वाले लोगों की अच्छी तरह पड़ताल करने और काम हो जाने के बाद ही उन्हें पैसे देने चाहिए। ऐसे मामले सामने आने के बाद पुलिस को आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
शिकायत कहाँ और कैसे करें? यदि आपके साथ या किसी परिचित के साथ ऐसी ठगी हुई है, तो बिना समय गंवाए नीचे दिए गए कदम उठाएं। साइबर हेल्पलाइन पर तुरंत टोल-फ्री नंबर 1930 डायल करें। यदि वित्तीय धोखाधड़ी के 2 घंटे के भीतर शिकायत की जाए, तो पैसे फ्रीज होने की संभावना बढ़ जाती है। ऑनलाइन शिकायत गृह मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल साइबर क्राइम पोर्टल पर जाकर पूरी जानकारी, चैट स्क्रीनशॉट और बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल्स अपलोड करें.लोकल पुलिस स्टेशन आप अपने नजदीकी थाने या साइबर सेल में जाकर भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। बैंक को सूचित करें, जिस बैंक अकाउंट या यूपीआई से पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उस बैंक को तुरंत सूचित कर ट्रांजैक्शन ब्लॉक करने को कहें। ठगी से बचने के जरूरी नियम पैसे कभी न दें। कोई भी असली कंपनी या सरकारी विभाग नौकरी देने के बदले पैसों की मांग नहीं करता है। वेबसाइट की जांच करें- सरकारी नौकरियों की जानकारी हमेशा सिर्फ आधिकारिक वेबसाइटों पर ही देखें। सत्यापन किसी भी अनजान नंबर से आए जॉब ऑफर पर भरोसा करने से पहले उस कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या लिंक्डइन प्रोफाइल पर जाकर वैकेंसी की पुष्टि करें जरूरत है कि जागरूक बने सावधान रहें सतर्क रहें ऐसा करके ही युवाओं को इस तरह की ठगी से बचाया जा सकता है। (मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)






