September 12, 2026
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तड़के ध्वस्तीकरण से मचा सियासी बवाल, अखिलेश यादव बोले—दूसरे धर्म का सम्मान न करने वाला सच्चा सनातनी नहीं

अनवर पठान

सहारनपुर । उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित वर्षों पुरानी मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद शनिवार, 5 सितंबर की सुबह बुलडोजर कार्रवाई के बाद फिर गरमा गया। प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मस्जिद का ध्वस्तीकरण कराया। रिपोर्टों के मुताबिक कार्रवाई तड़के शुरू हुई और कलेक्ट्रेट परिसर को पुलिस तथा पीएसी की सुरक्षा में घेर लिया गया।

मस्जिद को प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अवैध निर्माण माना गया था। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के खिलाफ मस्जिद प्रबंधन की ओर से अपील की गई थी, जिसे जिला जज की अदालत ने खारिज करते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा। रिपोर्टों के अनुसार निचली अदालत ने मस्जिद को सरकारी भूमि पर अनधिकृत निर्माण माना था और 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश भी दिया था।

110 साल से अधिक पुरानी होने का दावा

मस्जिद की ओर से अदालत में पुराने दस्तावेज पेश किए गए थे। पक्ष का दावा था कि यह धार्मिक स्थल काफी पुराना है और अंग्रेजों के समय मुस्लिम मजदूरों के लिए इसका निर्माण कराया गया था। इस संबंध में 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल भी अदालत में प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई। हालांकि अदालत ने इन दावों के बावजूद निर्माण को सरकारी भूमि पर अनधिकृत माना।

मस्जिद की उम्र को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में 110 से 119 वर्ष तक के आंकड़े सामने आए हैं। इसलिए इसकी सटीक उम्र को लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक दस्तावेजों को अंतिम आधार माना जाना उचित होगा।

बुलडोजर कार्रवाई से पहले इकरा हसन हाउस अरेस्ट

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए उनके आवास पर पुलिस बल तैनात कर हाउस अरेस्ट किया गया। इकरा हसन का कहना था कि वह सहारनपुर पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।

मामले को लेकर अन्य विपक्षी नेताओं की गतिविधियों पर भी प्रशासन की नजर रही। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी बल तैनात रहा तथा परिसर के प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए।

अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना

मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए धार्मिक सौहार्द का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते और दूसरे धर्मस्थलों को गिराते हैं, वे सच्चे सनातनी नहीं हो सकते।

अखिलेश यादव ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा सनातन सौहार्द और सभी धर्मों के सम्मान की भावना सिखाता है। उन्होंने कहा कि दूसरे की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाला व्यक्ति सच्चा हिंदू नहीं हो सकता।

सपा ने भेजा प्रतिनिधिमंडल

मामले को लेकर समाजवादी पार्टी ने भी गंभीर रुख अपनाया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर 6 सितंबर को सपा का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचने वाला है। प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी लेगा और घटना से जुड़े तथ्यों की रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगा।

कार्रवाई के बाद बढ़ी राजनीतिक गर्मी
कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्षी दल इसे धार्मिक और सामाजिक सौहार्द से जोड़कर सरकार को घेर रहे हैं, जबकि प्रशासन का पक्ष न्यायालय के आदेश और सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण के निर्णय पर आधारित है।

फिलहाल यह मामला अदालत के आदेश, प्रशासनिक कार्रवाई और धार्मिक स्थल को लेकर उठे राजनीतिक सवालों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में सपा प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट और संभावित न्यायिक कार्रवाई से मामले में नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैंगई।

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