
इमाम अली रिज़ा अलैहिस्सलाम की पैदायश पर हुई महफ़िल
राष्ट्र पटल संवाद
इटावा। आठवें इमाम अली रिज़ा अलैहिस्सलाम की विलादत के खुशनुमा मौके पर सोजख्वान तसलीम रज़ा की ओर से मस्जिद पंजतनी घटिया अज़मत अली में महफ़िल का आयोजन किया गया।
मौलाना अनवारुल हसन जैदी इमामे जुमा इटावा ने कहा जब इमाम अली रिज़ा को मदीने से मशहद बुलाया गया तो मशहद के हजारों लोगों ने इमाम की जियारत की। इमाम अली रिज़ा ने पैगाम दिया है कि जब नेक काम करो तो खुशी महसूस करो, अगर कोई गलती हो जाये तो तौबा करो, अल्लाह नेमत दे तो उसका शुक्र अदा करो, किसी से नाराज हो तो उसे माफ कर दो, मोमिन के लिए खुशी का सामान मुहैया करो। महफ़िल में सलीम रज़ा ने कलाम पेश करते हुए कहा मैं मशहद की मिट्टी में पैदा हुआ हूं, इसी में मैं अपनी जगह चाहता हूं। तनवीर हसन ने अपने कलाम में कहा चमक जाएगा दो पल में मेरी तकदीर का सूरज, मेरे माबूद मेरी जात मशहद के हवाले कर। अख्तर अब्बास रिज़वी ने कलाम पढा है तो बहुत ज़ियारते मशहद का मर्तबा, कुम होकर जाइयेगा तो दोहरा सवाब है। सलमान रिज़वी ने कलाम पेश किया जो इमामों के नाम आये हैं लाइके एहतराम आये हैं, ऐसी महफ़िल कौन छोड़ेगा जिसमे बारह इमाम आते हैं।
महफ़िल में अल्हाज कमर अब्बास नक़वी करबलाई, हाजी अरशद मरगूब, राहत अकील, शावेज़ नक़वी, दबीरुल हसन, मो. अब्बास, हसन अब्बास, इबाद रिज़वी, अली साबिर, ताबिश रिज़वी, अली इबाद अलीका, आतिफ एड., राहिल, जुनैद, जहूर नक़वी, शहजादे, राजा, लारेब रज़ा, तालिब रिज़वी, अर्श आदि ने भाग लिया।






