पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और शुभेन्दु अधिकारी के बीच सियासी जंग अभी खत्म नहीं हुई है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तृणतूल कांग्रेस (टीएमसी) को धराशायी कर दिया और शुभेन्दु मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए। वहां पहली बार भगवा सरकार बनी है तो सब कुछ बहुत जल्द बदल जाएगा यह सोचना भी गलत है। शुभेन्दु ने अपने फैसले लागू किये हैं। इसके साथ ही टीएमसी के मकड़जाल को भी तोड़ा जा रहा है। ममता बनर्जी की पार्टी के दबंग नेता जहांगीर खान फाल्टा विधानसभा सीट पर उप चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन मतदान से पहले ही उन्होंने हथियार डाल दिये हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेता कह रहे थे कि 4 मई के बाद (इसी दिन पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित किये गये थे) जहांगीर खान को जेल में डाल देंगे। उस समय जहांगीर खान भी मूंछों पर ताव दे रहे थे क्योंकि टीएमसी को फिर से अपनी सरकार बनने का अनुमान था। अब सब कुछ बदल गया है। ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट भी नहीं बचा पायीं। उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर जांच के शिकंजे कसते जा रहे हैं। ऐसे में जहांगीर खान का फैसला आश्चर्यजनक नहीं लग रहा है। पश्चिम बंगाल की सियासी जंग का यह दूसरा भाग है। अभी देखिए आगे-आगे क्या होता है?
पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर वोटिंग से पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव से अलग होने का फैसला किया है। इस सीट पर 21 मई को फिर से वोटिंग होनी थी लेकिन वोटिंग से 48 घंटे पहले ही उन्होंने चुनाव की दौड़ से खुद को अलग कर लिया। इससे पहले खान ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था और अग्रिम जमानत की अर्जी दी। उन्होंने कहा कि वोटिंग की तारीख से पहले उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। टीएमसी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने बताया कि फाल्टा से उसके उम्मीदवार जहांगीर खान ने 21 मई को विधानसभा क्षेत्र में होने वाले चुनाव से हटने का फैसला कर लिया है, लेकिन अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया।
इससे पहले जहांगीर खान ने कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच ने उनकी अर्जी स्वीकार कर ली थी, अपनी अर्जी में, खान ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनके खिलाफ मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। उन्होंने अपनी अर्जी में कोर्ट से यह निर्देश देने की भी गुजारिश की है कि राज्य सरकार उन्हें बताए कि राज्य पुलिस ने उनके खिलाफ कितनी एफआईआर दर्ज की हैं और उन एफआईआर में क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं।
इस बार अर्थात् 2026 में पश्चिम बंगाल का चुनाव महज वोटिंग तक सीमित नहीं रहा बल्कि युद्ध की रणभूमि में तब्दील हो गया है। बीजेपी के फेवर में एग्जिट पोल अनुमानों ने ही राज्य में तनातनी और बढ़ा दी थी। इस बीच पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के फाल्टा से उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने चुनाव आयोग द्वारा फाल्टा सीट पर री पोल (पुनर्मतदान) कराए जाने के फैसले का स्वागत किया। देबांग्शु पांडा ने कहा कि चुनाव आयोग का यह फैसला जरूरी था और इससे लोकतंत्र मजबूत होगा।
देबांग्शु पांडा ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के लोगों ने चुनावों को हाईजैक किया और इस बार भी वही किया गया। उन्होंने कहा कि फाल्टा में बीजेपी के चुनाव चिह्नों पर टेप चिपकाया गया, साथ ही स्याही और खुशबू का इस्तेमाल कर मतदाताओं को डराने धमकाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो भी भाजपा के पक्ष में वोट देता था, उसे धमकाया गया। भाजपा उम्मीदवार ने दावा किया कि फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के करीब 150 बूथों पर गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिसकी शिकायत चुनाव आयोग से की गई।
देबांग्शु पांडा ने यह भी कहा था कि 4 मई के बाद जहांगीर खान को जेल में डाला जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जहांगीर खान के लोग इलाके में गुंडागर्दी करते हैं और अब यह सब खत्म किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जो लोग डर और दबाव की राजनीति कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनने के बाद अवैध अतिक्रमण और घुसपैठ के खिलाफ सख्त बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है। हावड़ा स्टेशन और तिलजला जैसे इलाकों में सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से बनी दुकानों और बहुमंजिला इमारतों को ढहाने के लिए यह कार्रवाई की गई है। हावड़ा स्टेशन के पास और गंगा घाट के आसपास अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन और अनधिकृत दुकानों को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर बुलडोजर चलाए गए हैं। तिलजला में एक अवैध चमड़ा फैक्ट्री में आग लगने की घटना के बाद, सरकार ने आसपास के अवैध निर्माणों को गिराना शुरू कर दिया है। इस कार्रवाई के विरोध में पार्क सर्कस इलाके में कुछ हिंसक प्रदर्शन और पथराव की घटनाएं भी सामने आई। इस कार्रवाई को लेकर राज्य में तीखी सियासत हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुलडोजर एक्शन का कड़ा विरोध करते हुए इसे बंगाल की संस्कृति के खिलाफ बताया है और आरोप लगाया है कि इससे गरीब लोग प्रभावित हो रहे हैं।
उधर, जांच के दायरे में तृणमूल के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की संपत्तियां आई हैं। कोलकाता नगर निगम ने उनकी 21 संपत्तियों के प्लान जमा करने का आदेश दिया है। नगर निगम ने मंजूरी और निर्माण नियमों के अनुपालन की जांच के लिए नोटिस जारी किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अभिषेक बनर्जी की विशाल संपत्तियों की सूची पेश की थी। इसके बाद कोलकाता नगर निगम के भवन विभाग ने नोटिस भेजा। हालांकि, महापौर फिरहाद हकीम ने दावा किया था कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
अभिषेक बनर्जी की कंपनी ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ से संबंधित संपत्तियों के लिए दस्तावेज मांगे गए हैं। इसके अलावा, बरो कार्यालय संख्या 9 से सभी संपत्तियों पर नोटिस भेजे गए हैं। क्या ये संपत्तियां वैध हैं? यदि वैध हैं, तो दस्तावेज क्या हैं? कोलकाता नगर निगम के सूत्रों के अनुसार, यह नोटिस भवन विभाग अधिनियम की धारा 401 के तहत जारी किया गया है। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि सभी दस्तावेज 10 से 15 दिनों के भीतर जमा करने होंगे। हालांकि, यदि इस समय सीमा के भीतर सभी नोटिस प्राप्त नहीं किए जा सकते हैं, तो अभिषेक समय मांग सकते हैं।
पिछले दिनों शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार करते हुए कहा कि मैं कोलकाता नगर निगम से आपकी संपत्तियों की सूची लाया हूं। लीप्स एंड बाउंड्स की आपकी 24 संपत्तियां कोलकाता में हैं, और महलनुमा कार्यालय आमतला में है। पूर्णिगम सूत्रों के अनुसार, जिन संपत्तियों पर नोटिस भेजे गए हैं, उनमें हरीश मुखर्जी रोड पर स्थित एक मकान भी शामिल है। इसके अलावा कालीघाट चौराहे पर एक बहुमंजिला इमारत भी है। हालांकि, पूरी सूची अभी सामने नहीं आई है। इससे पहले लिप्स एंड बाउंड्स नाम की कंपनी भी केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में थी।
बहरहाल, पश्चिम बंगाल की सियासी राजनीति मंे अब दूसरी तरह का ऐक्शन शुरू हुआ है। अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी भी संभव है। -अशोक त्रिपाठी

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