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गुरु तेग बहादुर साहिब जी साहस, त्याग और बलिदान की प्रतिमूर्ति थे- तरनपाल सिंह कालरा

राष्ट्र पटल संवाद

इटावा। गुरूद्वारा श्री गुरूतेग बहादुर साहिब में श्री गुरूतेग बहादुर साहिब जी का प्रकाशोत्सव बड़ी ही श्रद्वा, उल्लास व धूमधाम के साथ मनाया गया।

प्रकाशोत्सव मनाने की तैयारियाॅ बड़े ही जोरों शोरों से चल रही थी,जिसमें शबद कीर्तन का गायन और साथ में 34 परिवारों द्वारा दिसंबर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सहज पाठ प्रारम्भ हो गये थे,जिसका कि समापन आज हुआ।

मंगलवार को गुरूपर्व पर गुरूद्वारा में सुबह से ही माथा टेकने वाले भक्तों,स्त्री व बच्चों का ताॅता लगा रहा,श्री गुरूतेग बहादुर सहिब जी के प्रकाश पर्व पर सभी समुदाय के लोगों ने गुरूद्वारा आकर माथा टेका और आपसी भाईचारे व एकता का सन्देश दिया।

गुरूद्वारा कमेटी श्री गुरूसिंह सभा गुरूद्वारा गुरमति प्रचार सभा इटावा के अध्यक्ष सरदार तरनपाल सिंह कालरा ने अपने सम्बोधन में बताया कि श्री गुरूतेग बहादुर साहिब साहस, त्याग और बलिदान की प्रतिमूर्ति थे,गुरू साहिब जी ने सर्व समाज के उत्थान के लिये काम किया और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढियाॅं भी उनसे प्रेरणा लेती रहेंगी।गुरू तेग बहादुर साहिब सिक्ख धर्म के नौंवे गुरू थे,उन्होंने अपने जीवन काल में धार्मिक स्वतंत्रा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिये संघर्ष किया,उनकी सहादत ने सिक्ख समाज को एक नयी दिशा दी,उन्हें हमेशा एक महान आत्मा के रूप में याद किया जाता है।गुरूसाहिब जी ने समाज में ऊॅच-नीच बेइंसाफी दूर करने के लिये वर्ण भेद, जात-पात, छूत-छात,रूढिवादिता, अन्धविश्वास और समाज में व्याप्त पारम्परिक गलत मान्यताओं का खण्डन किया तथा इन्हें मिटाने का प्रयत्न किया।

गुरूद्वारा के मुख्य ग्रन्थी भाई गुरदयाल सिंह व साथियों ने कीर्तन तथा अन्य विद्वानों कथावाचकों ने प्रवचन द्वारा संगत को निहाल कर दिया। बच्चों के ग्रुप के द्वारा बहुत ही प्रभावित करने वाला समूह गुरवाणी गायन किया गया। मुख्य ग्रन्थी भाई गुरदयाल सिंह ने कहा कि श्री गुरूतेग बहादुर साहिब जी का पैगाम जन-जन सम्पूर्ण विश्व के कल्याण के लिये था,हमें गुरूओं के बताये मार्ग व आदर्शाें पर चलना चाहिये।

गुरूद्वारा में पालकी साहिब के सामने फूलों से की गयी सजावट देखने योग्य थी जो कि बहुत ही आकर्षित कर रही थी।गुरूद्वारा में दीवान समाप्ति के पश्चात विशाल लंगर का आयोजन किया गया।

विदित हो कि श्री गुरूनानक जी द्वारा प्रारम्भ किये गये लंगर की व्यवस्था सम्पूर्ण राष्ट्र के सभी गुरूद्वारों में बदस्तूर चलती रहती है,बिना भेद-भाव के एक पंगत में राजा व रंक लंगर खाया करते हैं,ऐसी व्यवस्था केवल गुरूद्वारों में ही देखने को मिलती है।

गुरूद्वारा कमेटी के अध्यक्ष सरदार तरनपाल सिंह कालरा एवं समस्त पदाधिकारियों ने सभी श्रद्वालुओं,स्त्री सत्संग, अखण्ड पाठ साहिब की सेवा करवाने वाले परिवार मंजीत सिंह छावड़ा,किरन छावड़ा तथा 34 श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सहज पाठ करने वाले परिवारों व लंगर बनाने की सेवा करने वाले परिवारों तथा समूह साध-संगत का सहयोग के लिये हार्दिक धन्यवाद दिया तथा गुरूपर्व की सभी को लख लख बधाई दी।

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