बिहार और पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकारों का यह फैसला उचित ही है कि एसआईआर में बाहर किये गये मतदाताओं को सरकारी सुविधा पाने का अधिकार नहीं है। पश्चिम बंगाल की शुभेन्दु अधिकारी सरकार ने इसके तहत राशनकार्ड की जांच भी शुरू करा दी है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से लगभग 91 लाख मतदाताओं को हटा दिया गया। इनमें से 63 लाख को गैरहाजिर, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट के रूप में चिह्नित किया गया। चुनाव आयोग ने कहा कि बाकी 27 लाख में तार्किक विसंगतियां थीं- जैसे वर्तनी की गलतियां, लिंग दर्ज करने में त्रुटि, माता-पिता या दादा-दादी के साथ उम्र में असामान्य फर्कघ् आदि। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के तहत मतदाता पात्रता (क्वालिफिकेशन) पर चुनाव आयोग के फैसलों पर आपत्तियां सुनने के लिए 19 ट्रिब्यूनल नियुक्त किए थे। पिछले महीने से, जब ये ट्रिब्यूनल बने, तब से उनके पास 34 लाख से ज्यादा अपीलें दायर की गईं। यह साफ नहीं है कि इनमें से कितनी अपीलें अंततः सुनी गईं। शुरुआती दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोई भी मतदाता अगर खुद या अपने माता-पिता को 2002 की मतदाता सूची से जोड़कर दिखा पाता (जब पिछली बार एसआईआर हुआ था) तो वह पात्र माना जाता। लेकिन जब चुनाव आयोग ने तार्किक विसंगतियां श्रेणी पेश की, तो 60 लाख से अधिक मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने के लिए नोटिस भेजे गए. इनमें से 27 लाख से अधिक को अंततः हटा दिया गया।
एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गत 27 मई को बड़ा फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा एसआईआर प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि श्चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया है, अपनी शक्तियों के बाहर नहीं। पूरी प्रक्रिया को गैर-संवैधानिक करार नहीं दे सकते। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने अपना फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई के बिहार में शुरू किए गए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने फैसला दिया है कि एसआईआर प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए गैर-कानूनी कहकर रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि यह वोटर लिस्ट के सामान्य रिवीजन की प्रक्रिया से अलग है। कोर्ट ने एसआईआर को एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया बताया है। कोर्ट ने यह भी कहा, यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है। कोर्ट ने कहा, हमारा मानना है कि एसआईआर के दौरान जो कदम उठाए गए वह जरूरत के मुताबिक थे। वोटर पर खुद को साबित करने का बोझ डालने की दलील दी गई। हम इसे नहीं मानते। अगर कोई अपने पुराने निवास से अलग रह रहा है, तब भी वह पुरानी प्रक्रिया (एसआईआर) से अलग नहीं हो जाता। उसका या परिवार का नाम (पुराने एसआईआर में) होगा।एसआईआर में नाम कटने को नियम विरुद्ध नहीं कहा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा, श्चुनाव आयोग ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता के आधार पर उन्हें अपनी लिस्ट में जगह दी। इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता। यह नहीं कहा जा सकता कि एसआईआर का मकसद सिर्फ लोगों को बाहर करना था। अगर दस्तावेज सही न लगें तो चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट में जगह देने से मना कर सकता है। इसका मतलब यह नहीं लगा सकते कि चुनाव आयोग लोगों की नागरिकता तय कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमारा निष्कर्ष है कि एसआईआर संविधान और आरपी एक्ट की कसौटी पर खरा उतरता है। यह जितना विस्तृत काम है, उसके मद्देनजर चुनाव आयोग को नियम और प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता। हालांकि, वह संदिग्ध लोगों का मामला केंद्र सरकार को भेज सकता है।
इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद पीठ ने इसी साल की शुरुआत में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की ओर से शुरू की गई एसआईआर प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह संशोधन प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत चुनाव आयोग को दी गई शक्तियों से कहीं आगे जाती है। यह विवाद मुख्य रूप से चुनाव आयोग की उस शर्त से जुड़ा है, जिसके तहत साल 2002 (या कुछ राज्यों में 2003) की मतदाता सूची से बाहर रहे मतदाताओं को अब नागरिकता सिद्ध करनी होगी। इसके लिए उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति से अपना पैतृक संबंध साबित करना होगा, जिसका नाम उस समय की मतदाता सूची में दर्ज था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बीजेपी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी एक्सपोज हो गए हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, श्सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक घोषित किया। यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने शुरू से ही इसका विरोध किया क्योंकि वे भारतीय मतदाताओं के साथ नहीं बल्कि अवैध घुसपैठियों के साथ खड़े थे। यह सही मायने में एक राष्ट्रविरोधी कृत्य था। क्या राहुल गांधी आज भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए माफी मांगेंगे?
बहरहाल पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन के दौरान जिन महिलाओं के नाम हटा दिए गए थे, उन्हें राज्य सरकार की अन्नपूर्णा भंडार योजना का लाभ नहीं मिलेगा। शुभेन्दु सरकार के मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने यह जानकारी दी है। इस योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 3,000 रुपये की नकद सहायता राशि मिलेगी। यह योजना 1 जून से तृणमूल कांग्रेस सरकार के लक्ष्मी भंडार कार्यक्रम का स्थान लेगी, जिसके तहत लाभार्थियों को प्रति माह 1,500 रुपये दिए जाते थे। जिन महिलाओं के नाम सूची में हैं, उन्हें यह लाभ मिलेगा। मंत्री ने बताया “उससे पहले, एक विश्लेषण किया जाएगा। जिन महिलाओं के नाम एसआईआर के दौरान सूची से हटा दिए गए थे और जिन्हें लक्ष्मी भंडार का लाभ मिलता था, उनमें से कई को अब यह लाभ नहीं मिलेगा…”मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कवरेज कार्यक्रम सहित केंद्र सरकार की कई योजनाओं को लागू करने को भी मंजूरी दी। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चुनाव आयोग द्वारा किए गए मतदाता सूचियों के विशेष और गहन संशोधन के बाद हुए। इसमें 6 अप्रैल तक, लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे, जो प्रक्रिया शुरू होने से पहले की कुल मतदाता संख्या का लगभग 11.9 फीसद था। मतदान से पहले, न्यायाधिकरणों के समक्ष लगभग 34 लाख अपीलें लंबित थीं। इनमें से सात लाख अपीलें मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के विरुद्ध थीं और 27 लाख अपीलें उन व्यक्तियों द्वारा दायर की गई थीं जिनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के अंतर्गत गठित अपीलीय न्यायाधिकरणों ने 1,607 नामों को मतदाता सूची में पुनः जोड़ने की अनुमति दी थी। मंत्री पॉल ने कहा कि जिन व्यक्तियों की मतदाता सूची से बाहर किए जाने के खिलाफ अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं, उन्हें इससे अलग रखा जाएगा। पॉल भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल सरकार में महिला एवं बाल विकास एवं सामाजिक कल्याण मंत्री हैं।
इस सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पूर्व सरकार की कोई भी मौजूदा कल्याणकारी योजना बंद नहीं की जाएगी। उन्होंने यह जरूर कहा कि अस्तित्वहीन लाभार्थियों, फर्जी लाभार्थियों और गैर-भारतीयों को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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