
शायर बशीर बद्र के निधन पर इस्लामिया में हुई शोक सभा, शायरों ने दी श्रद्धाजंलि
राष्ट्र पटल संवाद
इटावा। देश के मशहूर पद्मश्री शायर डॉ. बशीर बद्र के निधन से उर्दू अदब की दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई और साहित्यकारों व शायरों ने उनके निधन को साहित्य व शायरी जगत के लिए बड़ी क्षति बताते हुए शोक संवेदना व्यक्त की।
शायर बशीर बद्र के निधन पर इस्लामिया कालेज में शोक सभा का आयोजन किया गया। प्रबन्धक मोहम्मद अलताफ ने कहा बशीर बद्र को उर्दू गजल को आम बोलचाल की सरल, रूमानी और बेहद प्रभावशाली भाषा में लिखने के लिए जाना जाता है। बशीर बद्र का जन्म 19 फरवरी 1935 को अयोध्या उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने उर्दू साहित्य की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी शायरी में प्रेम, विरह, अकेलापन और इंसानी रिश्तों की गहरी संवेदनाएं देखने को मिलती हैं। इस्लामिया कालेज के प्रधानाचार्य गुफरान अहमद ने कहा डॉ. बशीर बद्र का इस्लामिया कालेज से गहरा और ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। उन्होंने वर्ष 1949 में इस्लामिया कालेज से हाईस्कूल की शिक्षा पूरी की। उनकी शुरुआती स्कूली शिक्षा इस्लामिया इंटर कॉलेज इटावा से ही संपन्न हुई थी। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई हलीम कॉलेज कानपुर और फिर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से की। इस तरह इटावा के इस्लामिया कॉलेज का डॉ. बशीर बद्र के शुरुआती छात्र जीवन और उनकी साहित्यिक नींव से अटूट संबंध रहा है। साहित्य और उर्दू शायरी में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाज़ा था। डा. बशीर बद्र के निधन पर आयोजित शोक सभा में मसरूर हुसैन, डा. कुश चतुर्वेदी, मोहम्मद अतीक, फैजान वारिस, मोहम्मद जावेद, नाजिश इकबाल, अरशद मलिक ने भाग लिया। इसी क्रम में शायर साबिर हुसैन, सलीम वारसी, कमर, हाशिम नईमी, नदीम अहमद अहमद बरकाती, रौनक इटावी, शावेज़ नक़वी, आरिफ सिद्दीकी नूर, सागर इटावी, यासीन अंसारी, रियाज़ कलवारी, आमिर हुसैन, इमरान अंसारी, रईस भारती आदि ने दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।






