वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति मार्गों में व्यवधान ने दुनिया के अनेक देशों की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित किया है। ऐसे समय में भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग विशेष महत्व रखता है। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की भारत यात्रा इसी बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास मानी जा रही है।
डेल्सी रोड्रिगेज अपने मंत्रियों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आई हैं। उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक में ऊर्जा सहयोग प्रमुख विषय रहा। दोनों पक्षों ने तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने तथा दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी विकसित करने पर चर्चा की। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार बातचीत में अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम दोनों प्रकार की ऊर्जा परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। इसका अर्थ है कि सहयोग केवल तेल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिफाइनिंग, वितरण और ऊर्जा अवसंरचना जैसे क्षेत्रों तक भी विस्तारित हो सकता है।
भारत और वेनेजुएला के संबंध नए नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों ने कई मुद्दों पर सहयोग किया है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों के कारण ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग प्रभावित हुआ था। अब परिस्थितियों में बदलाव के साथ दोनों देश फिर से अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि वेनेजुएला भारत को ऊर्जा क्षेत्र में एक पसंदीदा साझेदार के रूप में देखता है। यह बयान अपने आप में महत्वपूर्ण है क्योंकि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है। दूसरी ओर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को निरंतर ऊर्जा आपूर्ति की आवश्यकता है, जबकि वेनेजुएला अपने विशाल तेल संसाधनों के लिए स्थिर और बड़े बाजार की तलाश में है। इस दृष्टि से दोनों देशों के हित एक-दूसरे के पूरक दिखाई देते हैं।
हाल के आंकड़े भी इस बढ़ती निकटता को दर्शाते हैं। मई 2026 में भारत वेनेजुएला का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बनकर उभरा। भारत ने प्रतिदिन लगभग 4.27 लाख बैरल वेनेजुएलाई तेल का आयात किया। इस मामले में केवल अमेरिका भारत से आगे रहा। भारतीय कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भी हाल के महीनों में वेनेजुएला के कच्चे तेल की प्रमुख खरीदारों में शामिल रही है। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय ऊर्जा कंपनियाँ वेनेजुएला को एक महत्वपूर्ण आपूर्ति स्रोत के रूप में देख रही हैं।
डेल्सी रोड्रिगेज की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और होर्मुज जलडमरूमध्य, जो भारत के तेल आयात का एक महत्वपूर्ण मार्ग रहा है, गंभीर दबाव में है। ऐसी स्थिति में भारत के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करना आवश्यक हो गया है। वेनेजुएला इस आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत ने पिछले वर्ष वेनेजुएला से तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया था। इसका कारण अमेरिकी नीतियाँ और वेनेजुएला पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएलाई तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा के बाद कई देशों ने सावधानी बरतनी शुरू कर दी थी। लेकिन इस वर्ष फरवरी में प्रतिबंधों में कुछ नरमी आने के बाद भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल आयात शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों में तेजी से सुधार आया है।
अपनी भारत यात्रा के दौरान डेल्सी रोड्रिगेज भारतीय तेल रिफाइनरियों का भी दौरा करेंगी और मुंबई मेंभी ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगी। यह संकेत देता है कि दोनों देश केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि उद्योग और निवेश के स्तर पर भी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो भारतीय कंपनियों के लिए वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं।
भारत के लिए यह साझेदारी केवल तेल खरीदने का मामला नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता हमेशा जोखिम पैदा करती है। इसलिए भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की नीति पर काम कर रहा है। रूस, अमेरिका, अफ्रीकी देशों और लैटिन अमेरिका के साथ बढ़ते ऊर्जा संबंध इसी नीति का हिस्सा हैं। वेनेजुएला के साथ मजबूत सहयोग भारत को अधिक विकल्प और बेहतर ऊर्जा सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
वहीं वेनेजुएला के लिए भारत एक विशाल और तेजी से बढ़ता बाजार है। भारत की आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा मांग आने वाले वर्षों में लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी वेनेजुएला के लिए आर्थिक स्थिरता और निर्यात बढ़ाने का अवसर प्रदान कर सकती है।
अंततः डेल्सी रोड्रिगेज की भारत यात्रा और दोनों देशों के बीच बढ़ती ऊर्जा साझेदारी वैश्विक ऊर्जा राजनीति में हो रहे बदलावों का प्रतीक है। ऊर्जा सुरक्षा आज केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक विषय भी बन चुकी है। भारत और वेनेजुएला यदि अपने सहयोग को आगे बढ़ाने में सफल रहते हैं, तो यह दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित होगा। साथ ही यह साझेदारी वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक नए संतुलन और सहयोग के मॉडल के रूप में भी उभर सकती है। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)

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