अंदर का गम जब शब्दों के माध्यम से बाहर निकलकर आता है तब चिट्ठी न कोई संदेश जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गये हजारी गजल बन जाती है। गजल किंग जगजीत सिंह ने म्यूजिक इंडस्ट्री को सदाबहार गाने और गजल दिए हैं। मगर एक वक्त ऐसा आया था, जब उन्होंने गायिकी से ब्रेक ले लिया था। उन्होंने गायिकी से दूरी बना ली और इसकी वजह उनके बेटे का निधन था। जब जगजीत सिंह ने वह गाना गाया तो यह उनके बेटे के लिए था। दरअसल, जगजीत सिंह और गायिका चित्रा सिंह के इकलौते बेटे विवेक सिंह का मात्र 20 साल की उम्र में एक कार एक्सीडेंट में निधन हो गया था। 1990 में इस दुखद घटना के बाद जगजीत बुरी तरह टूट गए थे।जगजीत सिंह ने पूरे एक साल तक म्यूजिक से ब्रेक ले लिया था। फिर वह धीरे-धीरे गायिकी में वापसी कर रहे थे। इस बीच उनके पास एक ऐसा गाना आया जिसने एक बार फिर उनके बेटे की यादों को ताजा कर दिया। इस गाने के बोल उन्हें उनके बेटे की याद दिलाता था।
जब भी बात गजल गायिकी की आती है तो हमेशा दिमाग में जगजीत सिंह का आता है, लेकिन क्या आपको पता है कि बॉलीवुड में आखिर गजल का दौर किसने शुरू किया था। जगजीत सिंह से तीन दशक पहले ही एक गायक ने अपने गजल से म्यूजिक इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया था।यह गायक उस वक्त इंडस्ट्री में आए, जब मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश जैसे गायक म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज करते थे। मगर उन्होंने अपने अलग तरह की गायिकी से नाम कमाया और गजल के किंग बन गए। यह गायक कोई और नहीं, बल्कि तलत महमूद थे। इंडस्ट्री में गजल गायिकी को मशहूर बनाने में तलत महमूद का ही हाथ था। वह अपनी कांपती और रेशमी आवाज में हर गजल को सुनने वालों के दिलों तक पहुंचा देते थे। 50 और 60 के दशक में तलत महमूद ने रोमांटिक और सैड सॉन्ग्स गाए। वह दिलीप कुमार की कई फिल्मों में उनकी आवाज बनकर छा गए थे।





