ऊर्जा संकट के 9 दिनों के भीतर ही सरकार ने जारी किया एलपीजी नियंत्रण आदेश।
सरकार ने गैस रिफायनरियों का घरेलू एलपीजी उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत प्रतिदिन बढ़ाकर 54 हजार टन कर दिया।
सरकार ने पेट्रोल पर 24 प्रति लीटर और डीजल पर 30 प्रति लीटर का भार स्वयं वहन किया।
वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद राजस्थान के बाड़मेर में पीएम मोदी ने इसी वर्ष 21 अप्रैल को नई रिफायनरी का किया लोकार्पण।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हैदराबाद के संबोधन में देशवासियों को ऊर्जा संकट के इस दौर में ऊर्जा सुरक्षा संयमित उपयोग कर कर्तव्य बोध के प्रति जागरूक किया है। पीएम की इस पांच सूत्री अपील में न सिर्फ आम जन के बीच संकट के हालात में मनोबल और विश्वास बने रहने की प्रेरणा है, साथ ही संकट से निपटने का मूलमंत्र भी है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज के अवरुद्ध होने से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने में भारत सरकार का कुशल प्रबंधन दुनिया के प्रभावित देशों के लिए एक मिसाल बन गया है। लेकिन मौजूदा समय में अमेरिका और इजराइल-ईरान के बीच जो हालात बने हैं उनसे ऐसा प्रतीत होता है कि फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट मार्ग निर्बाध खुलने की संभावना अभी नहीं है। इसके चलते सरकार को उर्जा संकट से निपटने के लिए मौजूदा संसाधनों की समीक्षा और ऊर्जा जरूरतों के प्रबंधन की दीर्घकालिक नीति बनानी पड़ रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकीर्ण मार्ग है, जिससे भारत अपनी 90 फीसदी से अधिक एलपीजी और लगभग 40 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में, जब दुनिया भर में ईंधन की भारी कमी और कीमतों में आग लगने का अंदेशा था, भारत सरकार ने अपनी दूरदर्शिता, कूटनीतिक कुशलता और त्वरित रणनीतिक निर्णयों से देश में ऊर्जा की सुव्यवस्था बनाए रखी और आम जनता पर बढ़ी कीमतों का भार भी नहीं पड़ने दिया।
भारत सरकार के कुशल प्रबंधन और कूटनीतिक संबंधों की बदौलत देश में उस समय भी डीजल पेट्रोल और एलपीजी की कोई दिक्कत नहीं हुई जब बाकी देशों में बेहद परेशानी और किल्लत खड़ी हो गई थी। स्पेन, मिस्र, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, जापान, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में वहां की सरकारों ने ईंधन राशनिंग, वर्क फ्रॉम होम, फ्यूल पास, स्कूल बंद जैसे अनेक कदम उठाए लेकिन भारत सरकार की सूझ-बूझ और प्लानिंग के चलते ईंधन राशनिंग नहीं हुई, स्कूल बसों, वाहनों व परिवहन यातायात की गाड़ियों को मांग के अनुरूप फ्यूल मिलते रहने से कोई स्कूल बंदी नहीं हुई और न ही कोई दफ्तर बन्द करने पड़े। यह सब त्वरित सरकारी हस्तक्षेप से संभव हो पाया है।
व्यवधान के 9 दिनों के भीतर-सरकार ने एलपीजी नियंत्रण आदेश जारी किया। रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दिया गया। घरेलू एलपीजी उत्पादन को 36,000 टन प्रति दिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया जो लगभग 50 फीसद की वृद्धि है। पीएनजी घरेलू उपभोक्ताओं और सीएनजी सार्वजनिक परिवहन को 100 फीसद आवंटन के साथ संरक्षित किया गया। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा रूस, संयुक्त राज्य अमरीका, पश्चिम बंगाल, अफ्रीका, अटलांटिक बेसिन से त्वरित संपर्क स्थापित कर ईंधन आपूर्ति की व्यवस्था की गयी।
भारत में एलपीजी की मांग लगभग 90,000 टन प्रतिदिन की है जिसे वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल के
माध्यम से 70 से 75000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है।भारत में घरेलू उत्पादन बढ़कर 54000 टन प्रतिदिन होने से शेष आयात की आवश्यकता घटकर 20,000 टन प्रतिदिन की रह गयी है। सरकार द्वारा आठ लाख टन कार्गो पहले ही सुरिक्षत किये जा चुके हैं जिससे आज हमारे पास चालीस दिनों का अग्रिम भंडार उपलब्ध है।
भारत सरकार ने ब्रेंट के उच्चतम मूल्य को बेअसर करने के लिए पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भार अपने ऊपर ले लिया। इस प्रकार पेट्रोल पम्पों पर आम जनता को कोई बढ़ा हुआ मूल्य नहीं देना पड़ा।
सरकार के निर्देश एवं प्रयासों के चलते रिफाइनरियां अपनी शत-प्रतिशत क्षमता पर चल रही हैं। इतना ही नहीं होर्मुज के संकट के समय जब क्रूड आयल महंगा हो गया और दुनिया में कोई नई रिफायनरी शुरू नहीं हो रही थी तब भारत में नई रिफायनरियां शुरू हुईं। यह उपलब्धि पूरी दुनियां मंे सिर्फ भारत को मिल पाई। इसका एक उदाहरण राजस्थान का बाड़मेर है जहां रिफायनरी का लोकार्पण 21 अप्रैल 26 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। यह महज एक संयोग नहीं बल्कि मोदी सरकार के दूरगामी निर्णयों का परिणाम है कि 2014 से 2026 के बीच 11 एलपीजी टर्मिनल दोगुने अर्थात् 22 हो गये हैं। पहले हम केवल 27 देशों से कच्चा तेल प्राप्त करते थे जबकि अब 40 देशों से हमंे कच्चा तेल मिल रहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि जापान जैसे विकसित देश ने इस ऊर्जा संकट के दौर में अपना सबसे संरक्षित तेल एवं गैस भंडार खोल दिया जबकि भारत के नये संरक्षित भण्डार बने और उनमंे हाथ भी नहीं लगाया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक संकट से निपटने के लिए देशवासियों से कई महत्वपूर्ण अपीलें कीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इशारा साफ है तेल कंपनियों को हो रहा आर्थिक नुकसान और सरकार का विदेशी मुद्रा का कम होता भंडार अब नागरिकों के समझदारी भरे दायित्व बोध से ही भर सकता है। नागरिकों का कर्तव्य है कि वे ऊर्जा का संयमित उपयोग करें, अनावश्यक यात्रा से बचें, सार्वजनिक यातायात साधनांे का उपयोग करें और सरकार का हर संभव सहयोग करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार रहें। यह न सिर्फ जरूरी है वरन देश के हर नागरिक को सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संकट से निपटने का संकल्प भी पैदा करने का प्रयास होगा। (हिफी)







